ऋण के मामले में झारखंड की स्थिति अन्य राज्यों से काफी बेहतर है। झारखंड पर संभवत: सबसे कम कर्ज है। प्रति व्यक्ति ऋण बोझ 2675 रुपए है। इस माह भारत सरकार ने झारखंड के लिए ऋण लेने की सीमा में 15,000 करोड़ की बढ़ोतरी की है, लेकिन सरकार की फिलहाल ऋण लेने की मंशा नहीं है। 1 अप्रैल 2024 को राज्य पर कुल ऋण 86,808 करोड़ रुपए था। पिछले वित्तीय वर्ष में झारखंड ने कोई कर्ज नहीं लिया, बल्कि 2505 करोड़ रुपए अपना कर्ज उतारा। मोटे तौर पर राज्य पर अभी जो ऋण है, वह जीएसडीपी का करीब 30 प्रतिशत है। झारखंड ने 2022-23 में रैंक 4 (एफएचआई स्कोर 51.6) हासिल किया, जो 2015-19 से 2021- 2022 की अवधि में रैंक 10 से काफी सुधार हुआ है। यह सुधार बेहतर राजस्व जुटाने, बढ़ी हुई राजकोषीय समझदारी और मजबूत ऋण वहनीयता से प्रेरित है। यह पाया गया कि झारखंड ने प्रभावी ढंग से गैर-कर स्रोत जुटाए हैं। कुल राजस्व के प्रतिशत के रूप में उनका अपना गैर-कर राजस्व औसतन 21% था। 2022-23 में, राज्य का राजस्व अधिशेष 3.3% था। राजकोषीय घाटा 1.1% था, जो उधार ली गई निधियों पर राज्य की कम निर्भरता को दर्शाता है। राज्य ने 2020-21 को छोड़कर 2018-19 से 2022- 23 की अवधि के लिए राजस्व अधिशेष का भी अनुभव किया। राजस्व प्राप्तियां 2021-22 और 2022-23 में धन का एक प्रमुख स्रोत थीं। औसत ब्याज दर में गिरावट की प्रवृत्ति बनी हुई है।


