ग्राम पंचायत लहसोड़ा में पिछले चार महीनों से जारी पेयजल संकट ने जलदाय विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात यह हैं कि अक्टूबर से जनवरी तक गांव के नलों में एक बूंद पानी नहीं आया, जबकि जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है। विभागीय अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। नलों में पानी नहीं आने की बड़ी वजह भी अब सामने आ गई है। जानकारी के अनुसार पानी छोड़ने वाला कार्मिक महावीर मीना अक्टूबर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। वहीं उसे मजदूरी का भुगतान भी नहीं हो रहा था, जिसके चलते उसने पानी खोलने का कार्य बंद कर दिया। 3 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो रोड जाम : ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर नल सप्लाई सुचारू नहीं की गई तो महिलाएं और पुरुष खाली बर्तन लेकर सड़क जाम करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन व जलदाय विभाग की होगी। 10 मोहल्लों की 2 हजार आबादी बूंद-बूंद को तरसी लहसोडा के मीना, बैरवा, शर्मा, प्रजापत, हरिजन, मुस्लिम, यादव, गुर्जर, खीर सहित 10 मोहल्लों की करीब 2000 आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीणों को एक किलोमीटर दूर से या निजी बोरिंग से पानी लाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है, जिन्होंने शुक्रवार को खाली बर्तन दिखाकर सांकेतिक विरोध भी जताया। अगर एक कार्मिक के एक्सीडेंट और मजदूरी भुगतान की वजह से 2000 लोगों को चार महीने तक पानी नहीं मिला, तो जेजेएम की निगरानी और जवाबदेही कहां है? विभाग का दावा-1-2 दिन में चालू होगी जल सप्लाई शुक्रवार को मौके का निरीक्षण किया गया है। यह योजना पंचायत के हैंडओवर थी। विभाग प्रयासरत है। एक-दो दिन में पानी की सप्लाई चालू करवा दी जाएगी। -हरिकेश मीणा, एईएन, पीएचईडी खंडार


