राजगढ़ में सोमवार को शहर में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक पाठ हुआ, जिसमें छात्रों, अधिकारियों, संतों और नागरिकों ने भाग लिया। महोत्सव ने आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया और जीवन मूल्यों की याद दिलाई। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने गीता को सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि वेद, पुराण और गीता जैसे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन आवश्यक है, क्योंकि ये हमारे संस्कारों और संस्कृति की पहचान हैं। डॉ. मिश्रा ने ‘कर्म करो, फल की चिंता मत करो’ और ‘गुरुजनों का सम्मान करो’ के संदेश पर जोर दिया। कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक पाठ किया और गीता के संदेश को जीवन में उतारने का उदाहरण पेश किया। पूर्व विधायक रघुनंदन शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश ‘जब-जब पाप बढ़ता है, तब-तब मैं जन्म लेता हूं’ का उल्लेख करते हुए इसे सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा बताया। भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह गुर्जर ने कहा कि संस्कारों और मूल्यों से जुड़े बिना विकास संभव नहीं है। उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से गीता आरती की और पुष्पांजलि अर्पित की, जिससे आयोजन स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बन गया। कार्यक्रम के समापन पर कलेक्टर को गीता को ‘राष्ट्रीय ग्रंथ’ घोषित करने संबंधी एक ज्ञापन भी सौंपा गया।


