भास्कर न्यूज | अमृतसर पावन वाल्मीकि तीर्थ में 27 नवंबर को झंडा लगाने को लेकर विरोध हुआ था। जिसके बाद पंजाब के कुछ धार्मिक संगठनों ने इसे तीर्थ की मर्यादा भंग होने की बात की थी। उसी मर्यादा के फिर से बहाल करने को रविवार को वाल्मीकि संत समाज और धार्मिक संगठनों ने पावन तीर्थ में जाकर नितनेम का पाठ किया। संत शुक्राचार्य दर्शन रतन रावण की अध्यक्षता में हुआ नितनेम पाठ सुबह 10 से शाम तक चला। इसी दौरान जिला औैर पुलिस प्रशासन के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। नितनेम पाठ में महंत मलकीत नाथ, महंत गिरधारी नाथ, सेवक नाथ, कुमार दर्शन, नरेश धीगान, चौधरी यशपाल, पवन द्रविड़, शशि गिल, सचिन असुर, ओम प्रकाश अनारियां, राकेश रिंकू, सुरिंदर गिल, प्रदीप गब्बर, रतन हंंस, शबील द्रविड़, राकेश राही, राज कुमार शानू, राजेश भील समेत समाज के कई लोग पहुंचे। पाठ के बाद धार्मिक संगठनों और संत समाज ने कहा कि तीर्थ में जब तक प्रभु वाल्मीकि जी का पावन सत्य चिन्ह नहीं लगता लाल झंडे को मान्यता नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा लाल झंडा किसी एक का है और पावन सत्य चिन्ह प्रभु वाल्मीकि जी का, जो समाज को एकजुट करने की प्रेरणा देता है। धार्मिक संगठनों ने कहा कि जिला प्रशासन ने मीटिंग करके तीन-चार दिन का समय मांगा था जो जल्द खत्म होगा। गौर है कि नितनेम पाठ से पहले समाज के 2 भाइयों में आपसी विवाद हो गया था। जिसे बाद में समाज के लोगों ने शांत करवाया।


