कहीं प्लान बनाने में ही बरसों न बीत जाएं:भोपाल में आईटी, विदिशा में टेक्सटाइल, सीहोर में एग्रो… ऐसे बन रहा हमारे मेट्रोपॉलिटन रीजन का खाका

भोपाल पिछले 20 साल से मास्टर प्लान का इंतजार कर रहा है। मास्टर प्लान तो आया नहीं, लेकिन इससे आगे सुपर प्लान की तैयारी शुरू हो गई है। यानी भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन(बीएमआर) का प्लान। सेप्ट, अहमदाबाद ने इसके लिए ग्राउंड पर सर्वे शुरू कर दिया है। यह प्लान तय करेगा कि अगले 30 साल में सड़क कहां होगी, उद्योग कहां और आबादी कहां बसेगी। भोपाल, मंडीदीप, सीहोर, आष्टा, रायसेन, सांची, उदयपुरा, विदिशा, नर्मदापुरम के लिए अलग-अलग प्लानिंग हो रही है।
कस्बों-गांवों को सैटेलाइट टाउन की तरह विकसित करने की तैयारी है। ट्रैफिक, पानी, सीवरेज और आबादी के दबाव को शहर से बाहर फैलाने का रोडमैप बन रहा है। हालांकि बड़ा सवाल है कि यह है कि प्लानिंग टेबल से धरातल तक कब और कैसे आएगी? क्या वास्तविक जरूरतों के अनुसार और समय पर यह प्लान बनेगा और लागू होगा? जहां जैसी संभावना वहां वैसा प्लान हाई-स्पीड रोड से जुड़ेगा पूरा रीजन
बीडीए के अफसरों का कहना है कि मेट्रोपॉलिटन रीजन के प्लान को हाई-स्पीड सड़कों, रिंग रोड, मेट्रो विस्तार और इंदौर-भोपाल कनेक्टिविटी के साथ तैयार किया जा रहा है। इंटीग्रेटेड टाउनशिप… पूरे रीजन में अलग-अलग मास्टर प्लान के प्लानिंग एरिया के बाहर की जमीन चिह्नित हो रही हैं। 40 एकड़ या अधिक में सर्व सुविधायुक्त इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित की जाएंगी। जो ग्रोथ सेंटर से जुड़ी होंगी भास्कर एक्सपर्ट – केके धोटे, डीन, प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, मैनिट
वास्तविक जरूरतों के अनुसार समयसीमा में प्लान बनाना जरूरी भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए बीडीए सेप्ट, अहमदाबाद के सहयोग से प्लान बना रहा है। सेप्ट के पास विशेषज्ञों की अच्छी टीम है। लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर पर भी पूरे सहयोग की जरूरत है। इस सहयोग के साथ समयसीमा में प्लान बने, यह सुनिश्चित करना जरूरी है। अनुभव यह है कि इस तरह के प्लान अनिश्चितकाल तक तैयार होते रहते हैं, तैयार हो जाएं तो मंजूरी के लिए सरकारी दफ्तरों में अटके रहते हैं।

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