प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट के दौरे से पहले जिला कांग्रेस की बैठक में जिले के पदाधिकारी और अन्य कांग्रेस नेताओं ने जमकर नाराजगी जताई। प्रदेश के सह प्रभारी विजय जांगिड़ की मौजूदगी में हुई इस बैठक में कुछ नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि पांच साल सरकार में मलाई खाने वाले नेता तो अब बैठकों में नजर ही नहीं आते। वहीं जांगिड़ ने कहा कि जो पदाधिकारी बैठकों में नहीं आते उनकी सूची तैयार की जाए। यदि तीन से ज्यादा बार बैठक में शामिल नहीं हुए तो उनके खिलाफ वे खुद कार्रवाई करेंगे। दरअसल, कांग्रेस भवन में शहर जिला कांग्रेस के कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक पहुंचे नेताओं के बीच ही आपस में तकरार देखने को मिली। विकास उपाध्याय ने कहा कि रायपुर शहर के 70 वार्डों में पार्षद चुनाव लड़ने वाले नेता भी बैठक में उपस्थित नहीं हुए हैं। बहुत कम लोग इस तरह की बैठकों में आते हैं। इस दौरान सतनाम पनाग ने उन्हें टोक दिया तो कुछ समय के लिए माहौल गरमा गया। इसके बाद विकास ने कहा कि जब हमने शहरों में जीत दर्ज की, तभी हम सरकार में आ पाए। यदि शहर नहीं जीतेंगे तो सरकार कैसे बनेगी और शहरों की बैठकों में ही पूरे नेता मौजूद नहीं रहते। कृषि विवि में एबीवीपी के कार्यक्रम पर सवाल उठाना चाहिए
प्रमोद दुबे ने कहा कि एबीवीपी का कार्यक्रम कुछ दिन पहले ही कृषि विवि में हुआ था। इस पर पीसीसी को सवाल उठाना चाहिए था कि वहां के जिम्मेदारों ने राजनीतिक कार्यक्रम के लिए शैक्षणिक संस्थान को कैसे दे दिया। इस मामले में लिखा-पढ़ी भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की शहर में स्थिति ऐसी है कि यहां तो कुछ वार्डों में कांग्रेस के दो-तीन आदमी तक नहीं हैं। 15 साल बाद पांच साल के लिए सरकार बनी पता ही नहीं चला
बैठक में एक नेता ने कहा कि तीन साल जोगी जी की सरकार थी पता ही नहीं चला। फिर 15 साल संघर्ष किए इसके बाद फिर पांच साल के लिए सरकार बनी लेकिन पांच साल कैसे बीता यह भी पता नहीं चला। इन पांच सालों में जिन लोगों ने सत्ता में बैठकर मलाई खाई वे तो अब कांग्रेस की बैठकों में नजर तक नहीं आते। आज तक चुनाव आयोग नहीं जा पाए
श्रीकुमार मेनन ने कहा कि हम लगातार परिसीमन के कारण चुनाव हारने की बात करते हैं लेकिन आज तक हम ज्ञापन देने के लिए चुनाव आयोग तक नहीं जा पाए हैं। सिर्फ बोलने से काम हो जाएगा क्या इस पर पार्टी के नेताओं को सोचना चाहिए। बैठक के दाैरान फूलछाप कांग्रेसियों को पार्टी से बाहर करने पर भी बात हुई। इस दौरान कुछ नेताओं ने कहा कि चुनाव के समय कई नेता कांग्रेस का साथ देने की बजाय विरोधी खेमे के नेताओं को भीतर से मदद करते हैं।


