छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील किसान:परम्परागत खेती और आधुनिक तकनीक से ऐसा सिस्टम बनाया कि खेती से कमा रहे सालाना 30 लाख रुपए

मौसम के साथ न देने, खाद और बीज की कमी होने, कृषि संबंधी संसाधन महंगे होने या कीट-रोग का प्रकोप होने से किसानों को खेती में अक्सर नुकसान का सामना करना पड़ता है। लेकिन जांजगीर के राहौद निवासी किसान परम कुर्रे ऐसे किसान हैं, जिन्होंने परंपरागत खेती व आधुनिक तकनीक का ऐसा सिस्टम बनाया कि 12 एकड़ से सालाना 30 लाख रुपए तक आय हो रही है। परम ने बताया, 8 साल पहले मैं धान की खेती किया करता था। उसमें लागत तो अधिक थी और आय कम। इसलिए जैविक पद्धति से सब्जियां उगाने का फैसला लिया। मेरे पास दो देशी गायें थी, तो घर में ही गोबर गैस का प्लांट लगा लिया। इससे घर में खाना बनाने के लिए फ्री गैस मिलने लगी। इससे जो स्लरी निकलती है, वह खेतों में खाद के रूप में काम आने लगी। जब ज्यादा गोबर की जरूरत पड़ी तो सरकारी योजनाओं का लाभ लेते हुए मैंने गिर और जर्सी नस्ल की गायें खरीदी। उनके आहार के लिए आधा एकड़ में नेपियर घास उगाई। नेपियर घास और सब्जी की खरपतवार हरे चारे के रूप में मवेशियों के काम आई। इससे प्रतिदिन 70 लीटर दूध मिलने लगा, जिससे एक लाख रुपए प्रतिमाह इनकम होने लगी। बायो गैस प्लांट में गोबर खाद और गैस ज्यादा बनने लगी। सब्जी और दूध से सालाना 12-12 लाख, धान से 4 लाख, खीरा और ककड़ी से 2 लाख को मिलाकर अब कुल 30 लाख रुपए सालाना इनकम होने लगी है। अब मैं गोबर से ही बिजली बनाने की तैयारी कर रहा हूं। इसके लिए सरकारी कार्यालयों में योजनाओं की जानकारी जुटा रहा हूं ताकि कम खर्च में प्लांट स्थापित कर सकूं। हालांकि शुरुआती चरण में मैं गोबर से केवल अपने घर के उपयोग लायक बिजली तैयार करना चाहता हूं। इसमें सफल रहने के बाद विस्तार करूंगा। परम का कहना है, खेत के आधा एकड़ हिस्से में मैंने तालाब बनाकर मछली पालन भी शुरू किया है। मैं क्षेत्र में पहला ऐसा किसान हूं जो खेत में लगी फसल पर दवा का छिड़काव ड्रोन से कर रहा हूं। पारंपरिक तरीके से दवा के छिड़काव में पूरा दिन लग जाता है। जबकि ड्रोन से दवा का छिड़काव करो तो 7 से 8 मिनट ही लगते हैं। धान व सब्जी में कीट से फैलने वाली कई बीमारियां ऐसी हैं, जो 24 घंटे में ही फसल को काफी नुकसान पहुंचा देती हैं। ऐसे में ड्रोन के उपयोग से दवा का छिड़काव कर फसल को इस नुकसान से बचा सकते हैं।

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