कांग्रेस के दिग्गज नेता सज्जन सिंह वर्मा ने आज एसआईआर को लेकर बयान दिया है। वर्मा ने कहा है कि देशभर में लागू किया गया स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अब सिर्फ मतदाता सूची का संशोधन नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों पर नागरिकता सिद्ध करने का अवैध दबाव बन चुका है। मध्यप्रदेश कांग्रेस यह साफ करती है कि SIR संविधान, कानून और लोकतांत्रिक तीनों का उल्लंघन है। विपक्ष लगातार संसद में SIR पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार बहस से भाग रही है और इसे चुनावी सुधार बताकर भ्रम फैला रही है। सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि रिप्रेसेन्टेटिव ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 के अनुसार मतदाता सूची संशोधन केवल विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों में, और लिखित, सार्वजनिक कारणों के आधार पर किया जा सकता है। लेकिन अब तक ECI ने एक भी लिखित कारण पूरे राज्य के लिए सार्वजनिक नहीं किया। अनुच्छेद 327 संसद को मतदाता सूची पर कानून बनाने का अधिकार देता है। लेकिन ECI खुद को सबसे ऊपर बताकर संसद के अधिकारों को चुनौती दे रहा है। SIR के जरिए हर नागरिक से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मौजूदा मतदाताओं को नागरिक माना जाता है, उन्हें अपनी नागरिकता सिद्ध करने की जरूरत नहीं। यह अभ्यास नागरिकों पर “बोझ का उल्टा भार” डालता है। सज्जन सिंह वर्मा ने अंत मे कहा की SIR लोकतंत्र नहीं, डर और संदेह का अभ्यास है। चुनाव आयोग अपने संवैधानिक दायरे से बाहर जाकर काम कर रहा है और सरकार उससे मिली हुई है। यह देश को NRC जैसी अराजकता की ओर धकेलने का प्रयास है। कांग्रेस संसद से सड़क तक इसका विरोध करेगी।


