सिंगरौली नगर निगम की राजनीति सोमवार को उस समय गरमा गई जब कांग्रेस पार्षदों ने एकजुट होकर महापौर रानी अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्षद अखिलेश सिंह, शेखर सिंह, रामगोपाल पाल, बंतो कौर और रविंद्र सिंह ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता की। इसमें उन्होंने महापौर के कार्यकाल को पूरी तरह विफल बताते हुए उन पर सत्ता के दुरुपयोग और जोड़-तोड़ की राजनीति करने के आरोप लगाए। पार्षदों को तोड़ने और भेदभाव करने का आरोप पार्षद अखिलेश सिंह ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि महापौर और उनके पति कांग्रेस पार्षदों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम में विकास कार्यों के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है। बीजेपी समर्थित पार्षदों के वार्डों में काम को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि कांग्रेस पार्षदों के क्षेत्रों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि यह कार्यशैली नहीं बदली, तो वे सड़क से सदन तक आंदोलन करेंगे। अविश्वास प्रस्ताव की वापसी पर खुलासा प्रेस वार्ता में पार्षद शेखर सिंह का बयान चर्चा का विषय बना रहा। उन्होंने नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडेय के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर सफाई देते हुए कहा कि इससे पीछे हटना कोई रणनीति नहीं बल्कि ‘मजबूरी’ थी। उनके अनुसार, महापौर ने अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन के बदले कुछ ऐसी शर्तें रखी थीं जो उन्हें स्वीकार्य नहीं थीं, इसी वजह से प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। महापौर और निगम अध्यक्ष का पलटवार कांग्रेस के इन हमलों के बाद महापौर रानी अग्रवाल ने भी फौरन प्रेस वार्ता बुलाई। उन्होंने कांग्रेस के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताया।


