पंजाब कांग्रेस के सांसद और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने अमृतसर-गुरदासपुर बाढ़ मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है कि केवल जूनियर इंजीनियरों को सजा देना पर्याप्त नहीं है; असल में उच्च अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। 26 व 27 अगस्त की नाजुक घड़ी में मौके पर कौन थे? नियमों की पालना क्यों नहीं की गई? माधोपुर के साथ समन्वय क्यों नहीं किया गया? लोगों को पारदर्शी जवाब और न्याय चाहिए। उम्मीद है कि मेरी चिट्ठी पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। रंधावा ने अपने पत्र में मुख्य रूप से 4 प्वाइंट उठाए हैं, जो कि इस प्रकार हैं- रणजीत सागर डैम से पानी छोड़ने से आई बाढ़ 26 अगस्त 2025 की रात को रणजीत सागर डैम से 6.0 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण अमृतसर और गुरदासपुर में अभूतपूर्व बाढ़ आ गई। यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी असफलता का स्पष्ट उदाहरण था। अब तक केवल एक कार्यकारी अभियंता और एक एसडीओ को निलंबित किया गया है। पंजाब की जनता सही सवाल पूछ रही है असली जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह सिंचाई विभाग के सचिव की थी, जिन्होंने पानी छोड़ने की अनुमति दी, या रंजीत सागर डैम और माधोपुर हेडवर्क्स के मुख्य अभियंताओं की, जो समन्वय और तैयारी सुनिश्चित करने में विफल रहे? जब तक इसका उत्तर नहीं दिया जाता, तब तक जवाबदेही अधूरी रहेगी। किस अधिकारी की डयूटी वहां पर लगाई थी RSD में रूल कर्व का पालन हुआ था क्या प्री-मानसून और मानसून अवधि के दौरान रणजीत सागर डैम (RSD) के लिए निर्धारित रूल कर्व का कड़ाई से पालन किया गया था? यदि नहीं, तो इस विचलन की अनुमति किसने दी? शाहपुर कंडी डैम पूरी तरह से कब तक चालू होगा ताकि वह अपने निर्धारित सिंचाई और बिजली उत्पादन कार्यों को पूरा कर सके, जो इस तरह की बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए बेहद जरूरी हैं? अधिकारियों ने गुमराह करने वाले बयान दिए इसी तरह परेशान करने वाले बयान मुख्य अभियंता (नहर) एवं मुख्य अभियंता शाहपुरकंडी बैराज द्वारा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया है कि 4.50 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी का बहाव शाहपुरकंडी और माधोपुर के बीच स्थित खड्डों से आया। लेकिन भौगोलिक रूप से इस क्षेत्र में इतनी क्षमता वाले खड्ड मौजूद नहीं हैं। उनका यह स्पष्टीकरण गुमराह करने वाला प्रतीत होता है। इससे गंभीर आशंका पैदा होती है कि यह जिम्मेदारी से बचने और प्रशासनिक विफलता को ढकने का प्रयास था, न कि वास्तविक तथ्यों को प्रस्तुत करने का। इस क्षेत्र में मौजूद खड्डों की संख्या और उनकी सटीक क्षमता का पारदर्शी ब्योरा तुरंत सार्वजनिक किया जाना चाहिए। जबकि उच्च स्तर के अधिकारी जांच से बच निकलेंगे। अमृतसर और गुरदासपुर की जनता, जिसने इस आपदा का सबसे बड़ा खामियाजा भुगता है, आपकी सरकार से यह स्पष्ट और पारदर्शी स्पष्टीकरण चाहती है कि वास्तव में उनकी विफलता कहा हुई।


