हाई कोर्ट की खंडपीठ ने करोड़ों रुपए के जेजेएम घोटाले से जुड़े मामले में ईडी से पूछा है कि उसने केवल दो फर्मों के खिलाफ ही जांच कार्रवाई क्यों की, वहीं प्रार्थी पक्ष की ओर से दिए गए प्रति जवाब में लगाए आरोपों का जवाब देने के लिए कहा है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा व जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह निर्देश बुधवार को पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से एएसजी भरत व्यास ने कहा कि मामले में कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारियां की हैं। आगे जांच में अन्य तथ्य आने पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके विरोध में प्रार्थी पक्ष की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी व डॉ. टीएन शर्मा ने बताया कि मामले में केवल दो फर्मों गणपति ट्यूबवेल व श्याम ट्यूबवेल के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज की है, जबकि उन्होंने दस्तावेज सहित सरकार को शिकायत दी थी, लेकिन कार्रवाई में बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है और उनके खिलाफ कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया। उन्होंने ओम इंफ्रा व मैसर्स मांगीलाल विश्नोई फर्म सहित अन्य के खिलाफ भी शिकायत की थी। उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनकर ईडी को कहा कि वह प्रार्थी पक्ष की ओर से दिए जवाब के प्रति जवाब में उठाई आपत्तियों का जवाब दें। खंडपीठ ने मामले की आगामी सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की है। सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-24 मामला कोर्ट ने RPSC सचिव से पूछा-नोटिस तामील के बाद भी कोई क्यों नहीं आया सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-2024 से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने 8 जनवरी को सुनवाई के दौरान आरपीएससी सचिव को सभी दस्तावेजों सहित वीसी से जुड़ने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने यह निर्देश सृष्टि सिंघल व अन्य की याचिकाओं पर दिया था। अदालत ने कहा कि मामले में नोटिस जारी करने के बाद उनकी तामील हो चुकी है, लेकिन आरपीएससी की ओर से कोई पेश नहीं हुआ है। केस आईओसी भी नहीं आए हैं, ऐसे में आयोग के सचिव ही स्पष्टीकरण दें। अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया कि आरपीएससी ने सहायक अभियोजन अधिकारी के 180 पदों भर्ती निकाली थी। मुख्य परीक्षा में करीब 3000 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, लेकिन केवल 4 ही सफल घोषित हुए, जबकि परिणाम के अनुसार अन्य अभ्यर्थी न्यूनतम अनिवार्य 40 फीसदी अंक भी नहीं ला सके, लेकिन भर्ती परीक्षा में शामिल कई अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में 40 फीसदी से ज्यादा अंक प्राप्त किए थे। इस भर्ती में उन अभ्यर्थियों को असफल किया है। ऐसे में इस परीक्षा का परिणाम मनमाना, अव्यावहारिक और संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ है। यह भी संभावना जताई गई कि परीक्षा के मूल्यांकन में त्रुटिपूर्ण मॉडल उत्तर और अत्यधिक कठोर अंकन कर मशीनी अंदाज में कॉपियां जांची गई हैं। इसलिए परीक्षा परिणाम रद्द कर नए सिरे उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर संशोधित परिणाम जारी हो।


