भास्कर न्यूज | नौडीहा बाजार सरकार आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले 5 साल तक के बच्चों को कुपोषण मुक्त और शिक्षित करने के लिए हर साल लाखों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। नौडीहा बाजार प्रखंड प्रमुख रेशम कुमारी ने बुधवार को नौडीहा बाजार में किराए के भवन में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया। सुबह 10:13 बजे आंगनबाड़ी केंद्र बंद और सेविका और सहायिका दोनों नदारद थीं। भवन के मालिक ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र बंद है। प्रखंड प्रमुख ने देखा कि पोषाहार का पैकेट सीढ़ी के नीचे रखा था। भवन के मालिक ने बताया कि पोषाहार चार महीनों से रखा हुआ है। वितरण नहीं किया गया है। मुझे आंगनबाड़ी भवन का किराया चार साल से नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद सेविका प्रियंका जायसवाल मेरे घर में आंगनबाड़ी केंद्र चला रही है। वहीं ग्रामीणों ने प्रखंड प्रमुख से शिकायत की कि सेविका प्रियंका द्वारा नियमित आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन नहीं किया जाता है। जिससे धात्री महिला और शिशु को लाभ नहीं मिल रहा है। लोगों ने बताया कि अधिकांश घर में चलने वाले आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहते हैं, सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। सीडीपीओ और सुपरवाइजर द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण नहीं किए जाने से सेविका मनमानी कर रही हैं। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र में न तो बच्चों की देखभाल होती है और न ही शिक्षण या पोषण संबंधी गतिविधियां चलती हैं। प्रखंड प्रमुख ने इस मामले को लेकर नाराजगी जताई और पलामू उपायुक्त और जिला बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को शिकायत करने की बात कही। प्रखंड प्रमुख ने बुधवार को 9:14 बजे न्यू प्राथमिक विद्यालय मननदोहर का औचक निरीक्षण किया। प्रमुख ने बताया कि मननदोहर स्कूल में बच्चों का नामांकन और उपस्थिति दोनों कम है। देखा की दस बच्चों में पांच बच्चों के पास सिर्फ खाली बैग है। कॉपी कलम किताब कुछ भी नहीं थे। पूछने पर रसोइया ने बताया कि एमडीएम में दाल, भात और आलू सोयाबीन की सब्जी बन रही है। इस पर प्रमुख ने बताया कि बच्चों को आज हरी सब्जी देनी है। पूर्व प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जितेंद्र यादव ने प्रमुख से कहा कि अभी जो वर्तमान अध्यक्ष हैं उनका कोई बच्चा का इस स्कूल में नामांकन नहीं है। स्कूल में बच्चों की कम उपस्थिति पर प्राचार्य ने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेज रहे हैं। जिसके कारण बच्चों की उपस्थिति कम है।


