किसानों को मोटे अनाज जैसे मड़ुआ, ज्वार व बाजरा जैसी फसलों की खेती करने के लिए किया जा रहा प्रोत्साहित, मिल रहे संतोषजनक नतीजे

भास्कर न्यूज | सरायकेला अच्छी वर्षा और समय से मानसून आने पर जिले में परंपरागत व तकनीकी कृषि अपने उफान पर है, जिसे लेकर किसानों में उत्साह है। युद्ध स्तर पर कृषि कार्य जारी है। जिले की प्रमुख उपज धान होने के कारण एक ओर जहां कृषि विभाग धान की खेती को सुसंगत तरीके से संपन्न कराने और किसानों को लगातार प्रोत्साहित करने के लिए प्रयास कर रहा है। वहीं, दूसरी ओर मिलेट मिशन योजना के तहत किसानों को मोटे अनाज जैसे मड़ुआ (रागी), ज्वार व बाजरा जैसी फसलों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके संतोषजनक नतीजे भी जिले में मिलने प्रारंभ हो गए हैं। नव पदस्थापित जिला कृषि पदाधिकारी रोशन नीलकमल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि बेहतर परिणाम के लिए प्रत्येक स्तर पर कार्य जारी है। इस वर्ष अच्छे कृषि कार्य की उम्मीद जताई जा रही है। जिलेभर में धनरोपनी का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। जिला कृषि विभाग द्वारा कुल एक लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर कृषि कार्य का लक्ष्य रखा गया था, जिसके एवज में गुरुवार तक के प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि निर्धारित लक्ष्य की 66% कृषि भूमि पर धनरोपनी का कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष पर धनरोपनी का कार्य जारी है। धान की खेती के लिए जिले के किसान कृषि कार्य करते रहे हैं। मिलेट मिशन योजना के तहत जिला कृषि विभाग द्वारा किसानों को मोटे अनाज जैसे मड़ुआ (रागी), ज्वार व बाजरा जैसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके तहत ज्वार की खेती के लिए 150 हेक्टेयर, बाजरे की खेती के लिए 40 हेक्टेयर व मड़ुआ की खेती के लिए 800 हेक्टेयर कृषि भूमि पर कार्य का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप जिले में मक्का की 0.91%, तिलहन की 11.37% व दलहन की 42.13% कृषि भूमि पर कार्य पूरा कर लिया गया है। जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि बीज वितरण के तहत 50% अनुदान पर लैंपस के माध्यम से बीज का वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। वहीं, बिरसा फसल विस्तार योजना के माध्यम से 100% अनुदान पर प्रखंड द्वारा बीज का वितरण किया जा रहा है।

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