किसानों की आय बढ़ाने और ‘एफआईआर’ तकनीक से खेती कर फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए साउथ एशिया बायोटेक के वैज्ञानिक किसानों को जागरूक कर रहे हैं। जागरूकता के लिए एमडीएच ने ‘मेरे गांव की मिट्टी’ अभियान चलाया हुआ है। जिसके तहत संवाद रथ गांव-गांव, ढाणी-ढाणी जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। शुक्रवार को रथ नागौर जिले के ग्रामीण इलाके में पहुंचे और किसानों को उन्नत खेती करने के बारे में जागरूक किया और टिप्स दिए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. केएस भारद्वाज और डॉ. नरेश ने किसानों को एफआईआर तकनीक से खेती करने के बारे में जानकारियां दी। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया- एफआईआर तकनीक से खेती करने पर प्रारंभिक 45 दिनों तक फसल में दवा के छिड़काव की जरूरत ही नहीं होगी। जीरे और मेथी पत्ता को बीमारियों से बचाने के लिए जिन कीटनाशकों का उपयोग होता है उन्हें ‘एफ’ यानी फंगीसाइड कहा जाता है। ‘आई’ यानी इंस्कटीसाइड का प्रयोग मच्छर, मक्खी, कीट-पतंगों से बचाव के लिए किया जाता है। और ‘आर’ यानी राइबोसोम उन दवाओं को कहा जाता है जिनका प्रयोग मित्र कीटों को बढ़ावा देकर उपज और मिट्टी की उर्वरता में सुधार के लिए किया जाता है। एफआईआर से कैसे करें बीजोपचार इस तकनीक के लिए बीजों का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए 100 बीज लेकर एक गमले में बो दें। अगर 80 या उससे ज्यादा का अंकुरण है तो वह उच्च क्वालिटी बीज है और उनसे फसल अच्छी होगी। एफआईआर तकनीक से बीजों का उपचार करने के लिए 1 किलो जीरे के बीज पर 2 एमएल फंगीसाइड यानी कारबेंडेजिम मिला दें और 2 घंटे छाया में सुखा दें। ये प्रोसेस ‘एफ’ को पूरा करेगा। ‘आई’ यानी इंसक्टीसाइड के लिए लाल दवा एडा क्लोपिड या थायोमेथक्ज़ाम इस्तेमाल करें और 2 घंटे के लिए फिर से बीज छाया में सूखने दें। और ‘आर’ यानी राइसोबियम मिट्टी का मित्र जीवाणु है जो जड़ों के आसपास छोटी बिल्डिंग बना देता है, जिससे पौधे को भरपूर नाइट्रोजन मिलती है। एमडीएच ग्रुप के चेयरमैन राजीव गुलाटी का कहना है कि राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों को पेस्टीसाइड और कीटनाशक मुक्त बनाने के लिए किसानों की जागरुकता के साथ-साथ उनका विश्वास और साथ जरूरी है। एमडीएच मेरे गांव की मिट्टी-जागरुकता अभियान के दौरान एमडीएच ग्रुप के सुरेश राठी ने किसानों को आश्वस्त किया कि अगर किसान एफआईआर पद्धति का प्रयोग कर मेथी पत्ता और जीरे की खेती करते हैं तो कंपनी मेथी पत्ता पर 20% तक और जीरे पर 15% तक बाजार भाव से ज्यादा कीमत देगी। कंपनी की इस घोषणा पर गांव वालों ने बेहद खुशी जाहिर की। गौरतलब है कि एमडीएच का जागरुकता अभियान अभी तक 60 से ज्यादा गांवों के 4 हजार से ज्यादा किसानों को प्रशिक्षित कर चुका है।


