गुरप्रीत सिंह बैंस कंडी की रेतली जमीन में एक बार फिर मूंगफली की खेती को प्रोत्साहित करने के मकसद से पंजाब स्टेट कौंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (पीएससीएसटी) ने भूंगा सिट्रस एस्टेट में मूंगफली को प्रोसेस करने के लिए प्लांट लगाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी। वह कंडी एरिया में उन किसानों को मूंगफली की काश्त के प्रति दोबारा प्रोत्साहित करना चाहती है, जो मूंगफली छोड़कर अथवा कम कर धान की खेती करने लगे हैं। इसी मकसद के मद्देनजर कौंसिल का एक नुमाइंदा कुछ समय तक इस क्षेत्र में मूंगफली का रकबा बढ़ाने और उत्पादन की मार्केटिंग करने का अध्ययन कर रिपोर्ट कौंसिल को सौंपेगा। प्रोसेसिंग प्लांट लगे तो बढ़ेगा रकबा: कई किसानों का कहना है कि मूंगफली को प्रोसेस करने वाला प्लांट लगने और उत्पाद की मार्केटिंग से अगर उन्हें 55-60 रुपए प्रति किलो रेट मिलता है तो किसान खुशी-खुशी मूंगफली की खेती दोबारा शुरू कर देंगे। यह काश्त जून में शुरू होती है, जो 90 दिन में तैयार हो जाती है। इस दौरान बरसात होती है। यह फसल रेतली जमीनों में भी अच्छी हो जाती है। एक एकड़ से 10-12 क्विंटल मूंगफली निकलती है। अगर भाव 50 रुपए से अधिक मिले तो प्रति एकड़ 50 हजार रुपए तक पैदावार हो सकती है। मीटिंग में किसानों के साथ बातचीत करते हुए कौंसिल टीम के सदस्य। पंजाब स्टेट कौंसिल की टीम में शामिल डॉ. शिवानी कलोतरा का कहना है कि डीसी कोमल मित्तल की अगुवाई में प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। अगर सब ठीक रहा तो यह काम पूरा होगा। कौंसिल का उद्देश्य किसानों की मदद करना है। हमारी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।


