कृषि शिक्षा विभाग:बाड़मेर व गुड़ामालानी में कॉलेज खोले, 3 साल बाद भी न फैकल्टी शुरू न ही व्याख्याता लगे

बाड़मेर में एग्रीकल्चर एज्यूकेशन भगवान भरोसे है। वर्ष 2022 में बाड़मेर और गुड़ामालानी में कृषि कॉलेज खोलने की घोषणा हुई। इसके अगले साल ही राजकीय कॉलेज गुड़ामालानी में ही दो कमरे और एक ऑफिस रूम में कॉलेज की शुरूआत कर दी। एडमिशन भी हो गए, लेकिन आज दिन तक वहां कृषि कॉलेज से जुड़ी फैकल्टी के व्याख्याता नहीं आए। 3 साल में गुड़ामालानी एग्रीकल्चर कॉलेज का बोर्ड भी नहीं लगा है। ऐसे ही हाल बाड़मेर कृषि कॉलेज के है।
कृषि मंडी परिसर में बने किसान भवन में कृषि कॉलेज खोला गया है, लेकिन यहां भी कोई व्याख्याता नहीं है। एक महिला व्याख्याता है वो भी सिर्फ एग्जाम करवाने के लिए आती है। इन दोनों कॉलेज के लिए 4.5-4.5 करोड़ की लागत से बिल्डिंग का निर्माण जून 2024 में पूरा होना था, लेकिन अब तक 70-80 फीसदी काम पूरा हुआ है। गुड़ामालानी: तीन साल में एक बार भी क्लास नहीं लगी, बिना पढ़े ही परीक्षा दी भास्कर टीम जब कृषि कॉलेज गुड़ामालानी पहुंची तो वहां, 10-12 स्टूडेंट ही थे। 3 साल में कृषि कॉलेज का बोर्ड तक नहीं लगा पाए। यहां स्टूडेंट के लिए 2 रूम है, लेकिन दोनों पर ताले मिले। प्रिसिंपल रूम भी बंद था। स्टूडेंट ने बताया कि बाड़मेर पीजी कॉलेज से व्यवस्था के तौर पर दो व्याख्याता रामेश्वर और महेश मीणा को लगाया गया है, जो सिर्फ एग्जाम करवाने आते हैं। आज दिन कभी क्लास नहीं लगी। करीब 150 स्टूडेंट है, जो बिना पढ़ाई के हर साल एग्जाम दे रहे हैं। कृषि कॉलेज की बिल्डिंग बन रही है। जून 2024 तक बिल्डिंग का काम पूरा होना था, लेकिन अभी तक काम अधूरा है। बाड़मेर: किसान भवन में एक व्याख्याता के भरोसे चल रहा है कृषि महाविद्यालय 2022 में बाड़मेर में भी कृषि कॉलेज खोलने की घोषणा हुई थी। इसके बाद से कृषि मंडी परिसर में स्थित किसान भवन में कृषि कॉलेज खोला गया है। यहां 157 स्टूडेंट है, लेकिन एक कमरे में सिर्फ 30 स्टूडेंट ही मिले। पीजी कॉलेज की एक महिला व्याख्याता को व्यवस्था के तौर पर यहां लगाया गया है। छात्रों का कहना है कि यहां पढ़ाने के लिए कोई नहीं आता है। अधिकांश छात्र बाहरी जिलों से होने के कारण परेशान हो रहे हैं। गेहूं रोड पर करीब 100 बीघा में कृषि कॉलेज की बिल्डिंग का निर्माण हो रहा है, लेकिन अब तक 70 फीसदी पूरा हुआ है। यह भी जून 2024 में पूरा होना था। प्रदेशभर में 47 कॉलेज, सिर्फ 17 स्टाफ ही, स्थाई भर्ती नहीं होने से आवेदन ही नहीं प्रदेश सरकार ने 47 कृषि कॉलेज खोले हैं, लेकिन हाल ये है कि किसी कॉलेज में स्वीकृत पदों पर फैकल्टी के व्याख्याता नहीं है। वजह ये है कि कॉलेज शिक्षा के अधीन इन कृषि कॉलेज को शुरू तो कर दिया, लेकिन यहां स्थाई नौकरी नहीं है। विद्या संबल योजना के तहत प्रति घंटा मानदेय दिया जाता है। कई बार भर्ती निकाली गई, लेकिन कोई आवेदन ही नहीं कर रहा है। ऐसे में वर्तमान में सभी कॉलेज नोडल कॉलेजों के अधीन व्यवस्था के तौर पर संचालित हो रहे हैं, जहां फैकल्टी का कोई व्याख्याता नहीं है। प्रत्येक कृषि कॉलेज में 1 प्रिंसीपल, 10 सहायक आचार्य, 2 सह आचार्य, 12 मंत्रालयिक कर्मचारी, 1 लाइब्रेरियन, 1 निजी सहायक और 1 सहायक लेखाधिकारी का पद है, लेकिन कहीं भी इन पदों पर स्थाई नियुक्ति नहीं है। व्यवस्था के तौर पर चला रहे कृषि कॉलेज “बाड़मेर जिले में दो कृषि कॉलेज है, एक भी फैकल्टी का व्याख्याता नहीं है। राजकीय कॉलेज से व्यवस्था के तौर पर इन्हें संचालित किया जा रहा है। पढ़ाने वाला कोई नहीं है, सिर्फ एग्जाम भी ही करवाए जा रहे है। राजसेस से भर्ती निकाली गई, जिसमें कोई रूचि नहीं दिखा रहा है।” -सोहनलाल परमार, कार्यवाहक प्रिंसिपल, राजकीय कॉलेज बाड़मेर।

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