केंद्र की रिपोर्ट:प्रदेश में मनरेगा से रोजगार पाने वालों में 70 प्रतिशत महिला श्रमिक आदिवासी बहुल जिले आगे, पश्चिमी जिलों में कम भागीदारी

मनरेगा का नाम बदलकर वीबी जी राम जी करने को लेकर जहां प्रदेश भर में भाजपा- कांग्रेस आमने सामने हैं। कांग्रेस रोजगार छीनने का आरोप लगा रही तो भाजपा 100 से बढ़ाकर रोजगार 125 दिन करने का दावा कर रही है। वहीं, मनरेगा के तहत हुए कच्चे पक्के कार्यों में महिलाओं को सबसे ज्यादा रोजगार दिया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी का औसत 58 प्रतिशत रहा है, लेकिन राजस्थान में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत से भी ऊपर जा पहुंचा है। केंद्र सरकार की ओर से जारी स्टेट परफार्मेंस रिपोर्ट के अनुसार मनरेगा के तहत महिलाओं को रोजगार देने में राजस्थान उत्तर भारत में पहले स्थान पर है। 2024-25 में कुल 31.66 करोड़ मानव दिवस सृजित हुए थे। आंकड़ों के अनुसार 2025 में 21 करोड़ मानव दिवस में से 14 करोड़ से अधिक अकेले महिलाओं के नाम हैं। हालांकि कुछ राज्यों में यह आंकड़ा इससे भी ज्यादा है, लेकिन बड़े राज्यों में राजस्थान अव्वल है। इसमें भी आदिवासी बहुल जिले डूंगरपुर व राजसमंद अग्रणी हैं। इन जिलों से पुरुषों के रोजगार के लिए पलायन करने के बावजूद महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम सबसे ज्यादा मिला है। डूंगरपुर 81.6% के साथ राज्य में प्रथम है। यहां महिला मेट की भी संख्या ज्यादा है। दूसरे नंबर पर राजसमंद में 78.9% भागीदारी रही। वहीं, बांसवाड़ा में 77.4% महिलाओं को काम मिला। इसी तरह भीलवाड़ा में 74.5%, प्रतापगढ़ में 75.20%, चित्तौड़गढ़ में 71.8%, उदयपुर में 73.10%, झालावाड़ में 70.60%, पाली में 70% और अजमेर में 68 .2% रिकॉर्ड महिला श्रमिक रहीं। वहीं, पश्चिमी राजस्थान के जिलों में यह भागीदारी कम रही है। जैसलमेर में 59.2%, बाड़मेर में 61.5% और बीकानेर में 63.4% महिलाओं को रोजगार मिला। इनकी भागीदारी बाकी जिलों से कम होते हुए भी राष्ट्रीय औसत से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024–25 में राज्य में कुल 31.66 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए। मनरेगा कार्यस्थलों पर मेट के रूप में महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। कई जिलों में 50% से लेकर 70% तक महिला मेट कार्यरत हैं। महिलाओं में अनुसूचित जाति से 21% तक भागीदारी रही। जबकि अनुसूचित जनजाति में इससे भी ज्यादा 24% आंकड़ा पहुंचा। दूसरे क्षेत्रों में भी महिलाओं को रोजगार मनरेगा को आजीविका मिशन से जोड़कर भी महिलाओं को रोजगार दिया गया है। इनमें प्रमुख कृषि सखी और पशु सखी है। प्रदेश में 6 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 9.34 लाख महिला किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ा गया है। वहीं, लगभग 9.28 लाख महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।

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