भास्कर न्यूज | अंबिकापुर बढ़ते तापमान के बीच गौ रक्षा वाहिनी और गौ रक्षा मंडल के सदस्य अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाते हुए बेसहारा मवेशियों व पक्षियों के लिए भी पानी और दाने की व्यवस्था कर रहे हैं। गर्मी का मौसम बेजुबान प्राणियों के लिए बेहद कठिन होता है। पानी की कमी और अत्यधिक गर्मी से उनके जीवन को खतरा उत्पन्न हो जाता है। इस संकट को ध्यान में रखते हुए कोरिया जिले के बैकुंठपुर के अनुराग दुबे और सरगुजा जिले के अंबिकापुर के अजय अग्रवाल जैसे सामाजिक कार्यकर्ता आगे आकर इस सेवा कार्य में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। शहर के विभिन्न स्थानों पर पानी के नाद (बड़े बर्तन) रखे जा रहे हैं, ताकि गाय, बैल, कुत्ते, बिल्ली जैसे जानवर प्यास बुझा सकें। साथ ही पक्षियों के लिए भी विशेष रूप से पानी और दाने की व्यवस्था की जा रही है। खुले मैदानों, सड़कों के किनारे, पार्कों और मंदिरों के पास इन सुविधाओं को स्थापित किया गया है, ताकि हर प्राणी तक पहुंच सके। बैकुंठपुर के अनुराग दुबे और अंबिकापुर के अजय अग्रवाल इस कार्य में विशेष रूप से सक्रिय हैं। अनुराग न केवल पानी और दाने की व्यवस्था करते हैं, बल्कि इन स्थानों की नियमित निगरानी भी करते हैं ताकि पानी और दाने की आपूर्ति में कोई कमी न हो। दोनों ही सामाजिक कार्यकर्ता अपने समर्पण और सेवा भावना के लिए प्रसिद्ध हैं। अंबिकापुर और बैकुंठपुर शहर में जगह-जगह पानी के नाद रखवाए गए हैं, ताकि प्यासे पशु अपनी प्यास बुझा सकें। इसके अलावा, पक्षियों के लिए भी पानी और दाने की व्यवस्था की गई है, जिससे वे भी गर्मी की तपिश से राहत महसूस कर सकें। बीते कई वर्षों से अनुराग दुबे और अजय अग्रवाल इस सेवा कार्य में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। दोनों ही पशुओं के प्रति संवेदनशील हैं। इस सेवा कार्य में स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिल रहा है। लोग इस पहल की सराहना कर रहे हैं और अपना योगदान दे रहे हैं। कुछ लोग पानी के नाद के लिए दान दे रहे हैं, जबकि कुछ लोग स्वयं जाकर पानी भरने का कार्य कर रहे हैं। सामाजिक संगठनों और विद्यालयों के छात्रों ने भी पक्षियों के पानी व दाने के लिए इस अभियान में भाग लेना शुरू कर दिया है। अनुराग दुबे ने कहा कि गर्मी के इस मौसम में बेजुबान प्राणियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हमारी छोटी सी मदद उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। तपती गर्मी में पशु-पक्षियों के लिए पानी का प्रबंध करना सिर्फ एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक मानवता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लोगों को इस सेवा में आगे आकर योगदान देना चाहिए, ताकि कोई भी बेजुबान प्यास से तड़पते न रह जाए। वहीं अजय अग्रवाल ने कहा, वे हर साल अपने जन्मदिन पर बेजुबानों के लिए पानी के नाद, बकेट लोगों में निशुल्क बांटते हैं। इसका उद्देश्य है कि हर प्राणी को उनकी आवश्यकता का ध्यान मिले और कोई भी बेजुबान प्यास या भूख से तड़प न रहा हो।


