टीकमगढ़ में बिजली लाइन सुधारने के लिए पोल पर चढ़ा युवक करंट लगने से जिंदा जल गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान मोहन अहिरवार (35) के रूप में हुई। हद दर्जे की लापरवाही यह है कि घटना के करीब छह घंटे तक शव बिजली के तारों पर लटका हुआ था। घटना गुरुवार सुबह करीब 9 बजे जिले से 40 किमी दूर डूडीयन खेरा गांव की है। हादसे से गुस्साए ग्रामीणों ने टीकमगढ़-छतरपुर रोड पर चक्काजाम कर दिया, जो अब भी जारी है। गांव वालों का आरोप है कि हादसा लाइनमैन की लापरवाही के कारण हुआ है। विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही बल्देवगढ़ तहसीलदार अनिल गुप्ता और थाना प्रभारी प्रीति भार्गव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। तहसीलदार ने बताया कि लाइनमैन पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। इसके अलावा नौकरी संबंधित प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद लोगों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया। देखिए घटना स्थल की तस्वीरें लाइनमैन ने अपनी मदद के लिए रखा था
भीम आर्मी जिलाध्यक्ष संजय अहिरवार के मुताबिक, टीकमगढ़ जिले के डूडीयन खेरा गांव में लाइनमैन हरिदास अहिरवार ने अपनी मदद के लिए प्राइवेट तौर पर मोहन अहिरवार को साथ रखा था। सुबह करीब 9 बजे लाइनमैन के कहने पर मोहन बिजली सुधारने के लिए खंभे पर चढ़ा था कि अचानक सप्लाई चालू हो गई। तेज करंट लगने से मोहन अहिरवार जिंदा जल गया। घर में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं
बल्देवगढ़ तहसीलदार डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि मृतक टपरियन गांव का रहने वाला था। उसके परिवार में बड़ा भाई सरमन अहिरवार है। वह किसान है। मोहन छोटा था। वह अपनी मां, पत्नी, दो बेटियां और दो बेटों के साथ रहता था। परिवार को सरकारी नौकरी की मांग
ग्रामीणों ने बिजली कंपनी के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की। इस पर तहसीलदार अनिल गुप्ता ने कहा कि बिजली कंपनी का कोई आने को तैयार नहीं है। आप लोग जानते हैं। आपसे कोई घटना घट जाए तो आप भी मौके पर नहीं जाओगे। लोगों ने मृतक के परिवार को सरकारी नौकरी की मांग की। इस पर तहसीलदार ने कहा कि नौकरी विभाग देता है। यह बिजली कंपनी का मामला है। उनके अधिकारियों से बात करेंगे। सहयोग में अगर एक नौकरी दे सकते हैं तो देना चाहिए। जूनियर इंजीनियर जितेंद्र जाटव के मुताबिक, खंभे पर चढ़ा युवक कंपनी का कर्मचारी नहीं है। वह गांव का ही रहने वाला है। यह भी जांच का विषय है कि लाइनमैन के कहने पर चढ़ा या खुद से ही चढ़ा है। फिलहाल लाइनमैन पुलिस कस्टडी में है।
जान जोखिम में डालते हैं कंपनी कर्मचारी
भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष संजय अहिरवार ने बताया कि युवक के पास कोई भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। लाइनमैन भी मौके पर था। दरअसल, लाइनमैन गांव के एक-दो लोगों को हेल्पर के तौर पर रख लेते हैं। खराबी आने पर उन्हें खंभे पर भी चढ़ा देते हैं। उन्हें 200 से 300 रुपए भी देते हैं। मोहन अहिरवार भी ऐसा ही व्यक्ति था। ऐसे में लाइनमैन लोगों की जिंदगी को दांव पर लगाकर काम करते हैं। ………………………………………… यह खबर भी पढ़ें…
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