खान एवं भूविज्ञान विभाग की ओर से रॉयल्टी ठेके देते समय खनिज की उपलब्धता और उससे अर्जित आय को नजरअंदाज किया जा रहा है जिससे अवैध खनन और परिवहन को बढ़ावा मिलता है और सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि होती है। बीकानेर वृत्त के चूरू जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कंसेंट टू ऑपरेट के मुताबिक मेसेनरी स्टोन के खनन से कुल वार्षिक उत्पादन की अधिकतम आय करीब 10 करोड़ रुपए है, लेकिन रॉयल्टी ठेका 15.73 करोड़ रुपए में जारी किया गया है। बीकानेर वृत्त के बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और जैसलमेर जिलों में अलग-अलग खनिजों के कुल 15 रॉयल्टी ठेके हैं। इनकी पड़ताल की गई तो सामने आया कि चूरू की रतनगढ़ तहसील की बीरमसर पहाड़ी में खान एवं भूविज्ञान विभाग की ओर से मेसेनरी स्टोन के 18 खनन पट्टे स्वीकृत हैं। ज्यादातर की वैधता वर्ष, 41 तक है। इन खनन पट्टों का कुल क्षेत्रफल 16.32 हेक्टेयर है और पर्यावरण स्वीकृति के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कंसेंट टू ऑपरेट के मुताबिक अधिकतम उत्पादन क्षमता 25,68,715 लाख टन है। वर्तमान में मेसेनरी स्टोन की रॉयल्टी 35 रुपए प्रति टन है। अगर 100 प्रतिशत उत्पादन भी हो तो 2568715 गुणा 35 यानी 8,99,05025 रुपए रॉयल्टी की वसूली होगी। इसके अलावा 89,90,503 रुपए डीएमएफटी और 17,98,100 रुपए आरएसएमईटी की वसूली हो सकती है जिसे मिलाकर कुल 10,06,93,628 रुपए की आय अर्जित की जा सकती है। जबकि, रॉयल्टी ठेका 15.73 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष में 10 अप्रैल, 25 से 31 मार्च, 27 तक दो साल के लिए दिया गया है। ठेका संचालन में भी एक से दो करोड़ रुपए खर्च करने होंगे और लाभांश भी होगा। सभी खनन पट्टे वन विभाग की जमीन पर हैं और अब वहां नए खनन पट्टे दिए जाना संभव नहीं, भूमि का डायवर्जन होना मुश्किल है, क्योंकि इसकी प्रक्रिया जटिल है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि हर साल पांच से सात करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई रॉयल्टी ठेकेदार कैसे करेगा। खान विभाग के अधिकारियों की ओर से ऐसे प्रस्ताव ही क्यों तैयार किए जाते हैं जिनमें गड़बड़ी, अवैध खनन और निर्गमन को बढ़ावा मिले और निर्धारित दरों से ज्यादा की वसूली की जाए। राजस्थान के सभी ईआरसीसी और आरसीसी रॉयल्टी ठेकों की जांच-पड़ताल होने पर ऐसी ही विसंगतियां सामने आ सकती हैं। गौरतलब है कि खान महकमा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पास है और वे गड़बड़ियों की शिकायतों पर आने वाले समय में रॉयल्टी ठेकों को बंद करने का बड़ा बयान भी दे चुके हैं। अधिकतम बोली पर दिया जाता है रॉयल्टी ठेका कार्यवाहक अतिरिक्त निदेशक वाईएस सहवाल का कहना है कि रॉयल्टी ठेका देने की सरकारी प्रक्रिया है। इसमें रिजर्व प्राइज तय कर ऑनलाइन बोली लगती है। जिसकी राशि सबसे ज्यादा होगी, उसे नियमानुसार सभी औपचारिकताएं पूरी करने पर ठेका जारी किया जाता है। बोली की राशि जितनी ज्यादा होगी, सरकार को राजस्व का उतना ही ज्यादा फायदा होगा। रॉयल्टी वसूली में अगर कोई गड़बड़ी मिलती है तो ठेका निरस्त करने की कार्यवाही की जा सकती है। खनन मामलों के जानकारी देवेन्द्रसिंह धमोरा का कहना है कि खान एवं भूविज्ञान विभाग के अधिकारियों की ओर से खनन पट्टों और क्वारी लाइसेंस की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता कंसेंट टू ऑपरेट के अनुसार आकलन किए बिना ही प्रभावशील ठेके की राशि में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी कर रिजर्व प्राइज तय कर दी जाती है। उसी के मुताबिक रॉयल्टी ठेके के प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेज दिए जाते हैं। इसी में अवैध खनन और निर्गमन की मौन सहमति शामिल होती है। पर्यावरण स्वीकृति, कंसेंट टू ऑपरेट, माइनिंग स्कीम की अवहेलना होती है। बिरमसर में मेसेनरी स्टोन रॉयल्टी ठेके में भी यही हो रहा है। खान विभाग के अधिकारी रॉयल्टी ठेका होने के बाद आंखें मूंद लेते हैं। सरकार को टोल प्लाजा की तर्ज पर खान विभाग को मैन पॉवर (ठेका संचालन) का ठेका जारी करना चाहिए और वसूली विभाग को ऑनलाइन प्राप्त होनी चाहिए। भास्कर एक्सपर्ट – अवैध खनन और निर्गमन की मौन सहमति बीकानेर वृत्त में कहां, कितने रॉयल्टी ठेके


