नागौर जिले के बिरलोका में झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से हुई 12 साल की मासूम को लेकर परिजन फिर से धरने पर बैठ गए है। प्रशासन के साथ कल गुरुवार की रात पांच सूत्री मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन जब आज सुबह तक आरोपी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ और उसकी गिरफ्तारी भी नहीं हुई तो आक्रोशित परिजन और ग्रामीण खींवसर जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर फिर से धरने पर बैठ गए हैं। परिजनों का कहना है कि जब तक पुलिस रिपोर्ट में हत्या की धारा शामिल नहीं की जाती और आरोपी को पकड़ा नहीं जाता, तब तक वे पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे। 7 दिन के इलाज के बाद जोधपुर में तोड़ा दम
घटना के अनुसार- गुलासर निवासी रघुवीर सिंह के 12 वर्षीय बेटे महिपाल सिंह को बुखार होने पर 12 दिसंबर को बिरलोका स्थित ‘गोविंद मेडिकल स्टोर’ ले जाया गया था। यहां झोलाछाप गिरधारी चौधरी ने बच्चे को इंजेक्शन लगाया। इसके तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। स्थिति गंभीर होने पर आरोपी खुद परिजनों के साथ बच्चे को लेकर जोधपुर ले गया, जहां उम्मेद अस्पताल में इलाज के दौरान महिपाल ने कल गुरुवार की सुबह 11 बजे दम तोड़ दिया। महिपाल पांचवीं कक्षा का होनहार छात्र था। मौत की खबर मिलते ही आरोपी फरार
अस्पताल में बच्चे की मौत की सूचना पर आरोपी गिरधारी चौधरी मौके से फरार हो गया। गुरुवार की शाम जब बच्चे का शव गांव पहुंचा, तो गुस्साए परिजनों ने झोलाछाप के क्लिनिक के बाहर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर पहुंचे खींवसर SDM सुनील पंवार और डिप्टी धरम पूनिया ने परिजनों को मांगें मानने का आश्वासन दिया। इसके बाद देर रात शव को खींवसर मॉर्च्युरी में रखवाया गया था। लेकिन सुबह पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर परिजनों ने फिर से धरना शुरू कर दिया। मेडिकल स्टोर सीज
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आरोपी गिरधारी चौधरी के मेडिकल स्टोर को तुरंत प्रभाव से सीज कर दिया है। जांच में सामने आया है कि कोविड काल के दौरान भी आरोपी का क्लिनिक सीज किया गया था। इसके बावजूद प्रशासन और चिकित्सा विभाग की अनदेखी के चलते वह दोबारा अवैध रूप से क्लिनिक चला रहा था। चिकित्सा मंत्री के गृह जिले में गिरती स्वास्थ्य व्यवस्था
बता दें कि खींवसर में पिछले दो महीनों में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से यह दूसरी मौत है। इससे पहले 20 अक्टूबर को भी पांचोड़ी में एक मासूम बच्ची की इसी तरह जान गई थी।


