गढ़वा के किसान ने केले के पौधे से बदली किस्मत:सोशल मीडिया में देखकर छत्तीसगढ़ से लाए 500 पौधे, हर महीने 50 हजार की कमाई‎

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अधिक समय गुजारना जहां सही नहीं माना जाता है, मेरे‎ लिए यही जीवन की बेहतरीन का आधार बन गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर केले की खेती से संबंधित‎ वीडियो देखकर अचानक मन में आया कि हम भी यहां केले की खेती शुरू कर सकते हैं। इसके बाद वीडियो पर दिए‎ गए नंबर से छत्तीसगढ़ के किसान से संपर्क किया। वहां से 20 हजार रुपए खर्च कर 500 केले के पौधे मंगवाए। यह‎ पौधे एक साल में कांधी गिरकर तैयार हो गया। इससे उत्साहित होकर पुनः एक हजार पौधे और मंगवाए। अब मेरे दो‎ एकड़ खेत में करीब 15 सौ केले के पौधे तैयार हैं। किसी भी धार्मिक अवसर पर जैसे दुर्गा पूजा, छठ, दीपावली,‎ सरस्वती पूजा आदि में एक महीने में एक से डेढ़ लाख की कमाई हो जाती है। 50 हजार रुपए की कमाई प्रत्येक माह तय जबकि सामान्य मौसम में प्रत्येक‎ महीने 50 हजार रुपए की आमदनी होती है। प्रत्येक वर्ष फसल लगाने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। एक पौधा‎ कांधी देने के बाद काट दिया जाता है। फिर उसमें से पौधा तैयार होकर कांधी देता है। इससे एक ही पूंजी में आठ से‎ दस फसल लिया जा सकता है। एक व्यक्ति पूरी खेती को संभाल सकता है। समय-समय पर मजदूर लगाकर केवल‎ पौधों के आसपास की गंदगी को साफ करना होता है।‎ खेती से पहले गोबर खाद का करें प्रयोग खेती से पहले मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए गोबर खाद का प्रयोग‎ करे‎ केले की खेती शुरू करने से पहले खेत की मिट्टी पर विशेष ध्यान देना होता है। मिट्टी की‎ उर्वरता बढ़ाने के लिए गोबर खाद और संतुलित जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है।‎ जिससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार हुआ। इसके परिणामस्वरूप केले के पौधों की बढ़वार‎ बेहतर हो रही है और पौधे स्वस्थ दिखाई दे रहे हैं।‎ सरकारी सहयोग मिले तो और बेहतर होगा पौधरोपण के बाद फसल को सुरक्षित रखने,‎ आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधा, उन्नत खाद और अन्य आवश्यक संसाधनों के‎ लिए विभागीय सहयोग अपेक्षित था। लेकिन समय पर यह सहायता उपलब्ध नहीं कराई‎ गई। यदि सरकारी स्तर पर मार्गदर्शन और संसाधन मिलते, तो खेती को और बेहतर‎ तरीके से किया जा सकता था। इसके बावजूद हौसला कम नहीं हुआ। उपलब्ध‎ संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए खेती को आगे बढ़ाया। थोड़ी बहुत बाजार की‎ समस्या है उसे भी जल्द हल कर लिया जाएगा।‎ जानिए… कौन हैं सतीश मेहता‎ सतीश मेहता गढ़वा जिला के रमना प्रखंड के मड़वानिया गांव‎ में रहते हैं। परिवार में इनके अलावा उनकी पत्नी व एक‎ लड़का व एक लड़की है। सतीश वर्तमान में रमना में केला‎ की खेती कर चर्चा में आ गए हैं। इसके पूर्व वे एक सामान्य‎ कृषक थे। खेती-बाड़ी से बमुश्किल उनका जीवन यापन होता‎ था। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद‎ उन्होंने जिस लगन और वैज्ञानिक सोच के साथ यह पहल की‎ है, वह क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक बन रही‎ है।‎

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