सेंट्रल यूनिवर्सिटी रांची में दो हजार से अधिक छात्र-छात्राएं विभिन्न विषयों की पढ़ाई कर रही हैं। अधिकतर स्टूडेंट्स विवि कैंपस में बने हॉस्टल में रहते हैं, लेकिन कई डिपार्टमेंट ऐसे हैं जिनके छात्रों को हॉस्टल नहीं मिला है। ऐसे छात्रों को बाहर किराये के मकान में रहना पड़ रहा है। बाहर रहने वाले छात्रों को रोजाना कॉलेज आना-जाना पड़ता है। कॉलेज आने-जाने के दौरान वे रोजाना छेड़खानी का शिकार हो रही हैं। दरअसल, सीयूजे का नया कैंपस चेड़ी-मनातू में बना है। यहां पिछले साल ही नई सड़क बनाई गई है। पर स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गई। शाम ढ़लते ही सड़क पर अंधेरा पसर जाता है। इस दौरान सड़क पर नशेड़ियों और मनचलों का जमावड़ा लग जाता है। जैसे ही छात्राएं कॉलेज कैंपस से बाहर निकलती हैं, मनचले उनके पीछे पड़ जाते हैं। इस रोड में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं है। पुलिस की पेट्रोलिंग भी नहीं होती है। ऐसे में छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। अनहोनी की आशंका से तीन किमी लंबी सड़क पार करने में थम जाती हैं छात्राओं की सांसें छात्राएं जैसे ही कॉलेज कैंपस से बाहर निकलती हैं, मनचले उनके पीछे पड़ जाते हैं। कई बार अंधेरे का फायदा उठाकर बाइक सवार मनचले छात्राओं को गलत तरीके से छूने का प्रयास करते हैं। हालात ऐसे हैं कि डर से छात्राएं ग्रुप बनाकर निकलने का इंतजार करती है। क्योंकि, उन्हें अकेले में मनातू गांव की सड़क पार करके रिंग रोड तक जाना होता है। छात्राओं ने बताया कि करीब तीन किमी लंबी इस सड़क को पार करने में उनकी सांसे थम जाती है। डरते-सहमते उन्हें रास्ता पार करना पड़ता है। क्योंकि, उन्हें इस बात का डर रहता है कि कहीं उनके साथ कोई घटना घट जाए। अगर ऐसा हुआ तो कोई देखने और बचाने वाला भी नहीं है। झांकती तक नहीं है पुलिस रिंग रोड से सीयूजे तक जाने वाली सड़क संकरी है। यहां करीब 60 फीट चौड़ी सड़क बननी थी, लेकिन मात्र 15 फीट सिंगल लेन सड़क बनाई गई। क्योंकि, ग्रामीण सड़क बनाने के लिए जमीन देने को तैयार नहीं थे। इसको लेकर कई बार ग्रामीणों आैर पुलिस-प्रशासन का आमना-सामना हो चुका है। कई बार हालात ऐसे बने कि कॉलेज के कुछ छात्र आैर कर्मचारियों के साथ कुछ दबंग लोगों ने मारपीट तक की। कई बार गर्ल्स हॉस्टल के आसपास मनचले गलत हरकत करते हुए इशारा करते हैं। इसकी सूचना मिलने के बाद एक-दो बार पुलिस की गश्ती बढ़ी थी, लेकिन पुलिस अब इस रूट में झांकने तक नहीं आती। कोई पुलिस पिकेट नहीं होने से सभी असुरक्षित महसूस करते हैं। सड़क पर अड्डा मारते मनचले सुनसान सड़क से गुजरतीं छात्राएं


