गरीबों की थाली में 3 माह सड़ा चावल परोसा अब सप्लाई रोककर राशन संकट में झोंकेंगे

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा जिले में जनवरी 2025 का 30 हजार क्विंटल चावल गोदाम में सड़ाने के मामले में अब और भी बड़ा खुलासा हुआ है। इस गोदाम का खराब माल अक्टूबर महीने से ही दंतेवाड़ा और गीदम ब्लॉक की 147 दुकानों में खपाने का खेल शुरू कर दिया गया था। मतलब गरीबों की थाली में लगातार तीन महीने तक कीड़ा लगा चावल परोसा गया। लोगों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन जिम्मेदारों ने आवाज अनसुनी कर दी। इसी जनवरी पूरा स्टॉक एकसाथ खपाने की तैयारी थी। हालांकि, इससे पहले ही पूरे घोटाले का भंडाफोड़ हो गया। इधर, बड़ी मात्रा में स्टॉक खराब मिलने के बाद अब जानकारी आ रही है कि दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले में अब 24-24 हजार क्विंटल चावल का स्टॉक ही बाकी है। अफसरों की मानें, तो 10-15 दिन में चावल सप्लाई न होने पर फरवरी महीने में पूरा दक्षिण बस्तर राशन संकट का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि जिले में कुल 173 पीडीएस दुकानें हैं। इनमें से 143 दुकानों (गीदम की 61 और दंतेवाड़ा की 82) में नियमित रूप से खराब चावल भेजा गया। वहीं, कुआकोंडा ब्लॉक के गोदाम में दूसरे जिले से भेजे गए चावल की क्वालिटी बेहतर मिली। गीदम वेयरहाउस में स्टॉक खराब होने का असर पड़ोसी जिलों पर भी पड़ा। वर्तमान में सुकमा जिले के कोंटा, दोरनापाल और सुकमा गोदाम मिलाकर सिर्फ 4000 क्विंटल चावल बचा है। बीजापुर और दंतेवाड़ा में केवल 24-24 हजार क्विंटल का स्टॉक मौजूद है। इस सीमित स्टॉक से ही जनवरी माह का वितरण हो रहा है। खराब स्टॉक के चलते पूरे दक्षिण बस्तर में आपूर्ति व्यवस्था चरमराने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की देरी और गोदाम प्रभारियों की लापरवाही ने गरीब परिवारों को दोहरी मुश्किल में डाल दिया है एक तरफ खराब चावल मिल रहा है, दूसरी तरफ राशन समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, गीदम वेयरहाउस में चावल खराब होने की प्रक्रिया अक्टूबर में ही शुरू हो गई थी। इसे नष्ट करने की बजाय खपाने का खेल चल रहा था। जांच में सामने आया कि लगभग 30 हजार क्विंटल खराब चावल जनवरी में पीडीएस दुकानों में भेजने की तैयारी थी। गोदाम के प्रभारी यह चावल ब्लेंड कर बेचने की योजना बना चुके थे। कई शिकायतें दबाई गईं, जब तक सुकमा और बीजापुर से भी आवाज नहीं उठी। दिसंबर में जब अन्य जिलों से भी खराब चावल की शिकायतें पहुंचीं, तब जाकर प्रशासन जागा। मामला सामने आया, जब कई गांवों में एक के बाद एक हितग्राहियों ने खराब चावल की शिकायत शुरू की। पोंदुम राशन दुकान में बबिता, रामबती और मंगली ने बताया कि दो महीने से जो चावल मिल रहा है, उसमें कीड़े और पाउडर भरा रहता है। धोने पर बदबू आती है। परिवार को खिलाएं तो कैसे? इसी तरह मसेनार में हितग्राही जग्गू, लखमा, पालो और सुदरु ने विक्रेता के सामने ही खराब चावल दिखाते हुए शिकायत की। विक्रेता का कहना था कि गोदाम से जैसा चावल आता है, वैसा ही बांटना पड़ता है। हमारे पास चावल बदलने का अधिकार नहीं। जांच में पता चला कि अधिकतर दुकानों में जो चावल पहुंचा, वह गीदम वेयरहाउस से भेजा गया था। यहां काफी मात्रा में चावल सड़ चुका है।

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