भास्कर न्यूज|गिरिडीह प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना गरीबों की सुरक्षा का कवच है। देश के 80 फीसदी लोग इससे सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। आर्थिक अभाव के कारण इलाज के लिए मोहताज रहने वाले गरीब गुरबा देश के बड़े- बड़े अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से इलाज कराकर स्वस्थ हो रहे हैं। लेकिन झारखंड में इस महत्वाकांक्षी योजना को ध्वस्त करने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे न सिर्फ आयुष्मान कार्डधारी मरीजों की परेशानी बढ़ गयी है, बल्कि उनका इलाज करने वाले गैरसरकारी व सरकारी अस्पताल खुद आर्थिक तंगी के शिकार होने लगे हैं। ये बातें पूर्व सांसद सह भाजपा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डा रवीन्द्र कुमार राय ने कही। इस मसले से उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रसाद नड्डा को अवगत कराया है और कहा है वे फौरन झारखंड सरकार को इस बारे में तत्काल दिशा निर्देश दें। दरअसल आईएमए हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया ने डा राय को इस समस्या से अवगत कराते हुए राहत िदलाने की गुहार लगाई थी। जिस पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लिया और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर झारखंड को इस गंभीर संकट से उबारने के लिए पहल करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि पिछले लगभग 1 वर्ष से झारखंड में आयुष्मान योजना से जुड़े 187 निजी संस्थागत और 26 सरकारी अस्पतालों के करोड़ों रुपए का भुगतान रुका हुआ है। इससे अस्पतालों में योजना को लेकर संदेह की स्थिति बन गई है। कई संस्थान आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज करने से हिचक रहे हैं। वहीं झारखंड सरकार के नकारात्मक रवैये से केंद्र सरकार की छवि पर भी इसका असर पड़ सकता है।


