राजकीय बीडीके अस्पताल अब मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। अस्पताल की आरसीएच (RCH) समन्वय समिति की उच्च स्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया है कि गर्भवती महिलाओं को अब सीबीसी (CBC) जैसी महत्वपूर्ण जांचों के लिए अस्पताल के अलग-अलग काउंटरों पर चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। ये सभी सुविधाएं अब ‘जनाना विंग’ के भीतर ही उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही, जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने और सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्र महिलाओं तक पहुँचाने के लिए नई रणनीति तैयार की गई है। बैठक की अध्यक्षता करते हुए पीएमओ एवं वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने पिछले महीनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि बीडीके अस्पताल वर्तमान में जिले में जटिल और सिजेरियन प्रसव का सबसे विश्वसनीय केंद्र बना हुआ है। अस्पताल का प्रदर्शन और सुविधाएं डॉ. भाम्बू ने बताया कि अप्रैल माह से अब तक अस्पताल में 4,000 से अधिक प्रसव सफलतापर्वक संपन्न हुए हैं, जिनमें से 1,500 से अधिक मामले सिजेरियन और जटिल प्रसव के थे। अस्पताल में एक ही परिसर में लेबर रूम, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक और उच्च स्तरीय नवजात शिशु इकाई (SNCU) होने के कारण गंभीर से गंभीर मामलों का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर ही संभव हो पा रहा है। आरसीएचओ डॉ. डीएन सिंह ने बैठक में कहा कि जिले में सर्वाधिक प्रसव के साथ-साथ जेएसवाई (JSY) और लाडो योजना का लाभ भी इसी अस्पताल के माध्यम से दिया जा रहा है। प्रत्येक ब्लॉक के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई गई है, जिसकी समीक्षा हर शुक्रवार को होगी। जन्मजात विकृति वाले बच्चों की पहचान के लिए डीईआईसी प्रबंधक और नर्सिंग अधिकारी रोजाना जांच करेंगे ताकि समय पर उपचार या रेफरल मिल सके। डिस्चार्ज के समय ही जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने और योजनाओं की जानकारी देने के लिए परिजनों को प्रेरित किया जाएगा। बैठक में आरएमओ डॉ. सिद्धार्थ शर्मा, प्रसूति रोग प्रभारी डॉ. प्रियंका शेखसरियां, डॉ. आकांक्षा सैनी, डॉ. सोनिया सैनी, डॉ. श्वेता, डॉ. सुशीला, डॉ. संजय खीचड़, डॉ. सुरेश मील, डॉ. नेमीचंद, डॉ. रविकांत, डॉ. नावेद सहित सीमा स्वामी, विनिता, कुंदनबाला, सतीश टेलर एवं अन्य नर्सिंग अधिकारी उपस्थित रहे।


