छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गैंगरेप और तीन हत्या के आरोपियों की सजा को आजीवन कारावास में बदलने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने माना है कि यह केस समाज को झकझोरने वाला है। फिर भी तथ्यों और परिस्थितियों में आरोपियों को मृत्युदंड की कठोर सजा देना उचित नहीं है। क्योंकि यह दुर्लभतम से दुर्लभ मामला नहीं है, जिसमें मृत्युदंड की कठोर सजा की पुष्टि की जानी चाहिए। पूरा मामला चार साल पहले कोरबा जिले में 16 साल की पहाड़ी कोरवा जाति की लड़की से गैंगरेप और हत्या के साथ ही उसके पिता और चार साल की बच्ची की हत्या का है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं होने और उनकी उम्र को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। दरअसल, कोरबा जिले के देवपहरी निवासी विशेष जनजाति समुदाय के परिवार के सदस्य सतरेंगा के संतराम मझवार की मवेशी चराता था। इसकी शर्तों के अनुसार संतराम उन्हें प्रतिवर्ष 8000 रुपए और 10 किलो चावल देने का एग्रीमेंट था। लेकिन, संतराम मंझवार ने साल भर के बकाया भुगतान नहीं किया और मवेशी चराने के लिए केवल 600 रुपए दिए और प्रति माह केवल 10 किलो चावल दिया। बाकी पैसे मांगने पर संतराम मंझवार ने टालमटोल करता रहा। पति व बच्चियों को ढूंढती रही पत्नी
धरमू की पत्नी ने पुलिस को बताया कि वो अपने पति व बच्ची के साथ मवेशी चराने का हिसाब-किताब करने संतराम के पास गई थी। इस दौरान कहा था कि हमारा पैसा दे दो फिर हम अपने घर चले जाएंगे, तब संतराम ने 600 रुपए नकद, कुछ दालें, चावल आदि दिए, जिसके बाद धरमू अपने गांव जाने के लिए ग्राम सतरेंगा के बस स्टैंड निकल गया। कुछ ही देर में संतराम व उसके साथी वहां पहुंच गए, जिन्होंने उन्हें रोक लिया और बाइक पर छोड़ने की बात कही। इस दौरान उन्होंने उसे बाइक पर भेज दिया और पति, बेटी व चार साल की नातिन को रोक लिया। उनके घर नहीं पहुंचने पर वो तलाश करने संतराम के घर भी गई थी। जिस पर उनका कुछ पता नहीं चला। उसकी शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी। जंगल में मिली परिवार के तीन सदस्यों की लाश
इस घटना के दूसरे दिन 30 जनवरी 2021 को गढ़-उपोड़ा के कोराई जंगल में एक परिवार के 3 लोगों की हत्या कर दी गई थी। मृतकों में देवपहरी गांव के धरमू उर्फ झकड़ी राम (45), उनकी बेटी (16) और नातिन सतमति (4) शामिल थे। जंगल में तीनों का शव मिला था। पिता के सामने लड़की से किया गैंगरेप फिर तीनों को मार डाला
धरमू की पत्नी के बयान के आधार पर पुलिस ने संदेहियों को पकड़कर पूछताछ की, तब पता चला कि आरोपी संतराम व अन्य मिलकर धरमू को अपने साथ लेकर गए। जहां रास्ते में आरोपियों ने रास्ते में शराब पी। इस दौरान उन्होंने धरमू को भी शराब पिलाई। आरोपियों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत मिलकर वारदात अंजाम दिया। पिता धरमू के सामने उसकी बेटी से गैंगरेप किया, जिसका उसने विरोध किया तो लाठी-डंडे से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी, जिसके बाद उसकी बेटी और चार साल की नातिन को भी मार डाला। जिला न्यायालय ने सुनाई थी फांसी की सजा
जांच के बाद पुलिस ने सतरेंगा निवासी संतराम मंझवार (45), अनिल कुमार सारथी (20), आनंद दास (26), परदेशी दास (35) और जब्बार उर्फ विक्की (21) के साथ ही उमाशंकर यादव (22) को गैंगरेप व हत्या के केस में गिरफ्तार किया, जिसके बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया। ट्रॉयल के बाद कोर्ट ने दोष सिद्ध किया, जिसके बाद जिला एवं अपर सत्र न्यायालय (पॉक्सो) के विशेष न्यायाधीश डॉ. ममता भोजवानी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, मानवीय और निर्दयता पूर्वक किया गया कृत्य वीभत्स, पाशविक और कायरतापूर्ण है। वासना को पूरा करने के लिए निर्दोष और कमजोर लोगों की हत्या की गई, जिससे पूरे समाज की सामूहिक चेतना को आघात पहुंचा है। इसलिए, चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। जबकि, एक आरोपी उमाशंकर यादव को आजीवन कारावास की सजा दी। हाईकोर्ट ने फांसी को आजीवन कारावास में बदला
फांसी की सजा की पुष्टि के लिए केस को हाईकोर्ट भेजा गया। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि हालांकि, यह पूरे समाज को झकझोरने वाला है, फिर भी, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में, अपीलकर्ताओं की आयु को देखते हुए और विचारपूर्वक विचार करने पर, हमारा मानना है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में मृत्युदंड की कठोर सजा उचित नहीं है। यह ‘दुर्लभतम से दुर्लभतम मामला’ नहीं है, जिसमें मृत्युदंड की कठोर सजा की पुष्टि की जानी है। हमारे विचार में आजीवन कारावास पूरी तरह से पर्याप्त होगा और न्याय के उद्देश्यों को पूरा करेगा। जिस पर हाईकोर्ट ने मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। वहीं, आरोपी उमाशंकर यादव की आवाजीवन कारावास की सजा को यथावत रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है।


