बीकानेर की गोचर भूमि के संरक्षण के लिए 27 जनवरी को दिया जाने वाला धरना स्थगित कर दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और जिले के विधायकों ने स्पष्ट किया है कि गोचर की भूमि अब बीकानेर विकास प्राधिकरण और जिला कलेक्टर के अधीन नहीं रहेगी। ये जमीन स्पेशल पैराफ्री जोन में रहेगी। इसके लिए राज्य सरकार ने एक आदेश भी जारी कर दिया है, जिसमें इस भूमि के बारे में कोई भी निर्णय राज्य सरकार की अनुमति के बिना नहीं होगी। आंदोलन कर रहे संत सरजूदास ने भी साफ कहा है कि आंदोलन स्थगित कर दिया गया है। दरअसल, धरने से दो दिन पहले सरकार ने ये निर्णय लेकर 27 जनवरी को प्रस्तावित धरने को स्थगित करवाने के लिए साधु संतों से आग्रह किया था। जिसके बाद साधुसंतों ने इसे स्थगित कर दिया है। गोचर भूमि के मुद्दे पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साफ किया है कि गोचर भूमि को बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा जाएगा। इस भूमि को लेकर जिला कलेक्टर भी कोई स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकेंगे। बिहारी बिश्नोई ने बताया कि मास्टर प्लान की आपत्तियों से जुड़ा एक पत्र सामने आया है, जिसमें अधिकांश आपत्तियां सरेहनथानियां गोचर से संबंधित हैं। यह गोचर करीब 5 हजार 418 हेक्टेयर भूमि क्षेत्र में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि आमजन की भावना को ध्यान में रखते हुए संबंधित गोचर भूमि को विशेष भूमि के रूप में चिन्हित किया जाएगा। भविष्य में इस क्षेत्र में किसी भी तरह के विकास संबंधी फैसलों पर रोक रहेगी। राज्य सरकार की अनुमति के बिना कोई भी निर्णय नहीं लिया जाएगा और इस भूमि का मालिकाना हक भी राज्य सरकार के पास ही रहेगा। बस स्टैंड को लेकर उठे सवाल पर बिहारी बिश्नोई ने कहा कि जो निर्णय पहले हो चुके हैं, वे हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले से बन रहे इलेक्ट्रिक बस स्टैंड के निर्माण को लेकर फिलहाल कोई नया निर्णय नहीं किया गया है। सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद साधु-संतों ने 27 जनवरी को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को स्थगित करने का निर्णय लिया है। गोचर भूमि को लेकर सरकार के रुख के बाद फिलहाल आंदोलन टल गया है।


