थाईलैंड, कंबोडिया और नेपाल में भारत के लिए इंटरनेशनल गोल्ड मेडल जीत चुकीं पुष्पा मिंज आज रांची के कडरू ओवरब्रिज के नीचे रेलवे लाइन किनारे सब्जी बेच रही हैं। सुबह 6 से 11 बजे तक सब्जीवाली बेचनेवाली यह लड़की पारा थ्रो बॉल की अंतरराष्ट्रीय चैंपियन है। उनकी झोली में गोल्ड मेडल ही नहीं, बल्कि तिरंगा फहराने का गर्व भी है। रांची से सटे नरकोपी गांव की रहने वाली पुष्पा मिंज के माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन बचपन से मिली मजबूती और खेल के प्रति जुनून ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। उन्होंने भूगोल में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और पढ़ाई के साथ पारा थ्रो बॉल को जीवन का हिस्सा बना लिया पुष्पा बताती हैं कि 2018 में उनमें खेलने की भावना जागी। उनके कोच मुकेश कंचन ने हर संभव मदद की। उन्होंने ही भरोसा दिलाया कि दिव्यांग होना अभिशाप नहीं है। उनके प्रोत्साहन से ही बेहतर प्रदर्शन कर सकी। …जब तिरंगा आंखों के सामने लहराता है तो लगता है सब छोड़ सकती हूं, खेलना नहीं पुष्पा मिंज ने दैनिक भास्कर को बताया कि वह हर टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए परिचितों से उधार लेकर जाती हैं। बाद में सब्जी बेचकर धीरे-धीरे कर्ज चुकाती हैं। कहा- कभी सोचती हूं खेल छोड़ दूं, लेकिन तिरंगा आंखों के सामने लहराता है तो लगता है सब छोड़ सकती हूं, खेलना नहीं। अब नेशनल चैंपियनशिप की तैयारी : इन दिनों पुष्पा 23-24 अगस्त को तमिलनाडु के कोयंबटूर में होने वाली चौथी नेशनल पारा थ्रो बॉल चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हैं। इरादा पक्का है। कहती हैं इस बार भी गोल्ड लाऊंगी। गोल्ड मेडल से सजी उपलब्धियों की लंबी लिस्ट:
नेपाल में पारा थ्रो बॉल इंटरनेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल।
थाईलैंड में इंटरनेशनल चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक।
कंबोडिया में अपनी खेल का शानदार प्रदर्शन कर गोल्ड हासिल किया।
एशियन लेवल पर पारा थ्रो बॉल प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
इनके अलावा भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं।


