गोविंददेव जी में मनाई गई व्यंजन द्वादशी:ठाकुर श्रीजी को अर्पित किए 101 व्यंजन, सुनहरे ऊनी कपड़े केसरिया मफलर पहनाए गए

जयपुर आराध्य श्री गोविंददेव जी मंदिर में मंगलवार, को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष द्वादशी पर व्यंजन द्वादशी उत्सव श्रद्धा और पारंपरिक रीति से मनाया गया। शीत ऋतु की शुरुआत के साथ होने वाले इस भोज परिवर्तन उत्सव में ठाकुर जी को ऐसे व्यंजन अर्पित किए गए, जो सर्द मौसम में विशेष ऊष्मा देने वाले माने जाते हैं। सुबह से मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ी और दिनभर उत्सवी माहौल बना रहा। उत्सव के तहत मंदिर प्रशासन ने ठाकुर जी को 101 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया। ठंड को देखते हुए ठाकुर जी को ऊनी वस्त्र, केसरिया मफलर और विशेष शीतकालीन अलंकरण पहनाए गए। श्रद्धालुओं ने कहा कि सर्दी की शुरुआत के साथ ठाकुर जी का यह शृंगार हर साल एक अलग ही भव्यता लेकर आता है, जिसे देखने पूरे शहर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। 101 व्यंजनों का महाभोग, खीर-खिचड़ा रहा मुख्य प्रसाद मंदिर सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने बताया- इस साल के 101 व्यंजनों में 56 तरह के छप्पन भोग और 25 प्रकार के कच्चे भोग शामिल रहे। मेवा मिश्रित खीर, दाल के बड़े और राधा रानी का प्रिय अढ़की भोग आज के महाभोग की प्रमुख आकर्षण रहे।
दोपहर 12 बजे से 12:30 बजे तक ठाकुर जी की उत्सव झांकी के विशेष दर्शन हुए, जिसमें ठाकुर जी को नवनिधि प्लीटेड केशरिय पोशाक, अंगरखी और शीतकालीन अलंकरणों से सजाया गया। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को खीर-खिचड़ा का प्रसाद वितरित किया गया। उत्सव की शुरुआत मंगल आरती और पंचामृत अभिषेक से हुई। इसके बाद ठाकुर जी को दस्ताने, मोजे और मफलर पहनाकर शीतकालीन स्वरूप में सेवा प्रारंभ की गई। व्यंजन द्वादशी के साथ ठाकुर जी की दैनिक सेवा भी अब शीतकालीन पद्धति में परिवर्तित हो गई है, जो अगले महीनों तक इसी स्वरूप में जारी रहेगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *