डीडवाना-कुचामन जिले के चितावा गांव में स्थित श्री गोपाल गौ सेवा समिति ने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समिति द्वारा गौशाला में आवासित गौवंशों के गोबर से गौकाष्ठ का उत्पादन किया जा रहा है। यह पहल मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत उपलब्ध कराई गई गौकाष्ठ मशीन के माध्यम से संभव हुई है। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि गौकाष्ठ मशीन से हो रहा यह उत्पादन राज्य सरकार की गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल गौशालाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। डॉ. सिंह ने आगे बताया कि गौकाष्ठ का उपयोग लकड़ी के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। इसे 8 रुपए प्रति किलोग्राम की निर्धारित दर पर खरीदा जा सकता है। गौकाष्ठ की बिक्री से प्राप्त आय का उपयोग गौशाला द्वारा गौवंशों की देखभाल, चारे की व्यवस्था और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए किया जाएगा। प्रभारी जिला गोपालन शाखा के डॉ. मुकेश बिलोनियां ने जानकारी दी कि गौशाला में उत्पादित गौकाष्ठ का उपयोग मोक्ष धाम, अंत्येष्टि स्थलों, फैक्ट्री बॉयलरों, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबों और मंदिरों में हवन जैसे धार्मिक एवं औद्योगिक कार्यों में किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह पहल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और सतत विकास को प्रोत्साहित करेगी।


