ग्रामीणों को ठगने के लिए रबी फसल की बीमा होता है, कुछ नहीं मिलता, हमलोगों को हो रही है परेशानी : किसान

जिले के किसानों का बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर से विश्वास उठते जा रहा है। स्थिति है कि किसान बीमा के लिए रुचि नहीं ले रहे हैं। यही कारण है कि विभाग का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2025-26 में रबि फसल के लिए सरकार की ओर से जिले में एक लाख 10 हजार किसानों का फसल बीमा कराने का लक्ष्य रखा गया है। मगर अभी तक महज 4157 किसानों ने ही फसल का बीमा कराया है। जबकि पिछले वर्ष 2024-25 में एक लाख किसानों का फसल बीमा का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें 12807 किसानों ने ही 11424 हेक्टेयर भूमि का बीमा कराया था। जबकि 18920 हेक्टेयर में गेहूं का आच्छादन हुआ था। इस वर्ष भी 19800 हेक्टेयर में आच्छादन का लक्ष्य रखा गया है। रबि फसल में गेहूं, राई-सरसों, चना व आलू की फसल का बीमा कराया जाता है। इन फसलों के नुकसान होने पर बीमा कंपनी की ओर से क्षति का आकलन कर राशि का भुगतान किया जाता है। इस वर्ष गेहूं के लिए प्रति हेक्टेयर 70 हजार 52 रुपये, राई-सरसों के लिए 46 हजार 701 रुपये, चना के लिए 54 हजार 485 रुपये व आलू के लिए एक लाख 81 618 रुपये निर्धारित किया गया है। रबि फसल की बीमा के लिए 31 दिसंबर 2025 अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। जिला सहकारिता पदाधिकारी नीलम कुमारी ने कहा कि वर्ष 2024-25 के खरीफ व रबि फसल की बीमा का राशि किसानों को मिलेगी। राज्य स्तर से भुगतान होता है। जिला स्तर पर सांख्यिकी विभाग के माध्यम से राज्य सांख्यिकी विभाग को क्रॉप कटिंग का रिपोर्ट भेज दी गई है। पानी में सड़कर फसल हो रही बर्बाद इस वर्ष अत्यधिक बारिश के कारण मक्का फसल पूरी तरह बर्बाद हो गया। वहीं बे मौसम बारिश और चक्रवाती तूफान से धान फसल भी सड़कर बर्बाद हो गया। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसान अलखनारायण चौबे, मानदेव चौधरी, राजीव रंजन चौबे, अवध किशोर चौबे, राजाराम ठाकुर, रामाशंकर आदि ने बताया कि वे लोग बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से खरीफ फसल का बीमा जिसमें मक्का एवं धान फसल का बीमा कराए हैं। विगत कई वर्षों से लगातार फसल बीमा कराते आए हैं। लेकिन हमें कुछ भी नहीं मिलता है।

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