घोटाला:डायल-112 में खेल, राजस्थान में काम कर रही जीवीके कंपनी को छत्तीसगढ़ में दोगुने रेट पर काम, 150 करोड़ का बोझ

राजस्थान में डायल-112 की 1000 गाड़ियां चलाने वाली जीवीके ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेस को छत्तीसगढ़ का भी काम सौंपा जा रहा है। लेकिन यहां अफसरों की मिलीभगत से कंपनी दोगुने रेट में काम करने जा रही है। इससे राजस्थान की तुलना में पांच साल में करीब 150 करोड़ रुपए अधिक छत्तीसगढ़ सरकार देगी। राजस्थान में मिले ठेके के मुताबिक गाड़ी, तीन ड्राइवर, डीजल, मरम्मत और वाहन में कुछ इक्यूपमेंट लगाने का काम कंपनी को मिला है। पहले 500 वाहन के लिए कंपनी को एक गाड़ी पर 66 हजार रुपए महीने दिए जा रहे हैं। छह महीने बाद दूसरे 500 गाड़ियों का ठेका 90 हजार रुपए प्रति वाहन पर दिया गया। जबकि छत्तीसगढ़ में इसका उल्टा है। यहां गाड़ी सरकार दे रही है। केवल तीन ड्राइवर, डीजल, मरम्मत और इक्यूपमेंट लगाने के लिए यहां एक वाहन पर सवा लाख रुपए देने का वर्क आर्डर एक-दो दिन में पुलिस मुख्यालय जारी करने वाला है। जीवीके को राजस्थान में एक हजार वाहन के लिए हर साल 94 करोड़ रुपए दिए जाते हैं और छत्तीसगढ़ में 400 वाहन पर ही 62 करोड़ रुपए का भुगतान होगा। अब सवाल यह है कि एक ही कंपनी को एक जैसा काम देने में दोगुना कीमत छत्तीसगढ़ सरकार क्यों देने जा रही है। सी-डैक को सौंप दिया आईटी का काम:
राजस्थान में आईटी का काम पुलिस विभाग ही देखता है। पुलिस के आरक्षकों की ड्यूटी कॉल सेंटर में लगाई जाती है। साफ्टवेयर का काम डीओआईटी करता है। छत्तीसगढ़ में यह काम सी-डैक को 115 करोड़ रुपए में सीधे नॉमिनेशन बेस पर दे दिया गया। जबकि सी-डैक ऐसे कामों के लिए सिर्फ साफ्टवेयर देती है। दो भागों में बंट गई व्यवस्था :
डायल -112 का 2018 में टाटा और एबीपी प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। इसका अनुबंध अगस्त 2023 में खत्म हो गया। 12 जून 2023 को टेंडर निकाला गया, जिसकी अंतिम तिथि 12 जुलाई 2023 रखी गई। इसके बाद तिथि को चार बार बढ़ाया गया। अंत में टेंडर निरस्त ​कर दिया गया। 14 मार्च 2024 को भाजपा सरकार ने फिर टेंडर निकाला और काम जेएडएचएल को देने की तैयारी थी। दैनिक भास्कर ने बताया कि इस कंपनी पर सीबीआई की जांच चल रही है। इसके बाद टेंडर निरस्त कर दिया गया। बाद में टेंडर के दो टुकड़े कर दिए गए। आईटी का काम सी-डैक को सीधे नॉमिनेशन पर दे दिया गया और वाहन के लिए गृह विभाग ने टेंडर निकाला। दो कंपनी में ही निकल गया टेंडर
गृह विभाग ने जेम पर 400 वाहनों के लिए 3 अक्टूबर 2025 को टेंडर निकाला था। इसमें सात कंपनियों ने टेंडर में पार्टिसिपेट किया। ईएमआरआई, डेनेब एंड पॉलेक्स टूर एंड ट्रेवल लिमिटेड, सम्मान फाउंडेशन, कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटिवेशन प्रोग्राम (कैम्प), विजन प्लस, जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड और एबीपी। पांच कंपनियों को बाहर करते हुए सिर्फ ईएमआरआई और डेनेब को टेंडर के लिए सलेक्ट किया गया। भंडार क्रय नियम काे ताक पर रखते हुए दो कंपनी होने के बावजूद टेंडर खोल दिया गया। डेनेब ने ईएमआरआई से 30 करोड़ रुपए अधिक प्राइज रखा था। ऐसे में सीधे ईएमआरआई को पांच साल के लिए 310 करोड़ में काम देने की अनुमति वित्त विभाग ने दे दी। इस नियम में फंस गईं 5 दावेदार कंपनियां
टेंडर की अंतिम तिथि 23 अक्टूबर तय थी और इसमें फाइनेंशियल 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट मांगी गई थी। ऑडिट करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर भारत सरकार ने तय कर रखी थी। 99 प्रतिशत कंपनियां पहले से अपना ऑडिट नहीं करवाती हैं, क्योंकि वे आखिरी दिन तक का बैलेंस शीट तैयार करना चाहती हैं। ऑडिट करवाने में भी दो सप्ताह लग जाते हैं। ऐसे टेंडर आने के बाद इस नियम में कई कंपनियां फंस गईं। यही वजह है कि सिर्फ दो कंपनियां ही पार्टिसिपेट कर पाईं। जबकि इस नियम को लेकर कुछ कंपनियों ने शिकायत भी पुलिस मुख्यालय में की थी। डीजीपी के पास पहुंची फाइल: वित्त से अनुमति मिलने के बाद गृह विभाग ने भी नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए डीजीपी को फाइल भेज दी है। अब एक-दो दिन में वाहन संचालन का काम जीवीके को पुलिस मुख्यालय सौंप सकता है। हालांकि इस मामले की शिकायत विधायक सुशांत शुक्ला ने मुख्य सचिव से की है। उनका आरोप है कि ईएमआरआई को काम देने के लिए टेंडर की शर्तें भी इस तरह बनाई गई थीं कि अधिक कंपनियां पार्टिसिपेट ही न कर पाएं। हर महीने निर्धारित रेट के हिसाब से हो रहा पेमेंट
जीवीके कंपनी को डायल-112 का काम दिया गया है। अभी राज्य में एक हजार गाड़ियों का ठेका जीवीके के पास है। कंपनी गाड़ी, तीन ड्राइवर और मरम्मत का काम खुद करवाती है। उसे सरकार हर महीने तय रेट के हिसाब से भुगतान करती है। प्रेमदन, नोडल ऑफिसर, डायल-112 राजस्थान राजस्थान में दो रेट- 66 और 90 हजार दिए जा रहे
राजस्थान में दो बार टेंडर हुए। पहले 500 गाड़ियों के लिए प्रति वाहन 66 हजार रुपए प्लस जीएसटी रेट तय किया गया है। बाकी 500 वाहन 90 हजार रुपए प्लस जीएसटी पर वर्क आर्डर मिला है। 2500 किमी से अधिक चलने पर डीजल का रेट अलग से दिया जाता है। -भानू सोनी, पीआरओ, जीवीके, राजस्थान

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *