चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) में रात बड़ा हादसा टल गया। यूनिवर्सिटी की एक लिफ्ट अचानक बंद हो गई, जिसमें दो छात्राएं करीब आधे घंटे तक फंसी रहीं। अंदर अंधेरा था और दोनों घबराकर जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। आखिरकार स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों की मदद से लिफ्ट खोली गई और दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर निकलते ही छात्राओं ने राहत की सांस ली। हॉस्टल रिसेप्शन पर बैठी छात्रा ने दी सूचना हॉस्टल नंबर-3 (सरोजिनी हाल) में रहने वाली छात्रा अलका ने बताया कि वह रात करीब 10 बजे रिसेप्शन पर किसी काम से आई थी। उसी दौरान अचानक लाइट चली गई। वहां बैठी एक पीयू की एक महिला थी जो वाचमैन को ढूंढने चली गई और उसी दौरान किसी लड़की की जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। जब उन्होंने ध्यान से देखा तो यह आवाज लिफ्ट के अंदर से आ रही थी। लिफ्ट में थोड़ी सी जगह से दिखाई दिया कि अंदर दो लड़कियां फंसी हुई थीं और लगातार मदद के लिए पुकार रही थीं। अलका ने बताया कि लड़कियां बाहर निकलने की गुहार लगा रही थीं और प्यास से बेहाल थीं। उसने कई बार कोशिश की कि किसी तरह पानी की बोतल अंदर पहुंचा सके, लेकिन जगह इतनी कम थी कि बोतल भी अंदर नहीं जा पाई। आधे घंटे की मशक्कत के बाद खुली लिफ्ट अलका ने तुरंत हॉस्टल नंबर-4 में सूचना दी। वहां से स्टाफ आया और लिफ्ट खोलने की कोशिश शुरू की। लेकिन काफी मशक्कत के बाद भी लिफ्ट नहीं खुली। इसके बाद पीयू कैंपस में तैनात दो पुलिसकर्मियों को भी बुलाया गया। सभी ने मिलकर लगातार कोशिश की और आखिरकार करीब आधे घंटे बाद लिफ्ट को खोला जा सका। बाहर आने के बाद छात्राओं ने कहा—“हमें लग रहा था कि अब हम अंदर ही फंसकर रह जाएंगे। क्योंकि अंदर अंधेरा था और सांस घुट रही थी। हमें बहुत डर लग रहा था और पानी की भी बहुत प्यास लगी थी। किसी ने रिस्पॉन्ड नहीं किया अलका ने बताया कि जब उसने लड़कियों की चीखें सुनीं तो तुरंत पीयू के सीनियर अधिकारियों को फोन किया। लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया और न ही बाद में कोई मौके पर आया। उसने कहा—“यहां शाम के बाद लड़कों की एंट्री बंद कर दी जाती है। अगर आसपास कोई लड़का होता तो मदद मिल सकती थी। न ही यहां कोई सायरन सिस्टम है कि खतरे की स्थिति में तुरंत आवाज बजाकर सभी को सतर्क किया जा सके।”


