चंपाई हाउस अरेस्ट; पुलिस से झड़प के बीच ग्रामीणों ने रोपा धान… एडीएम, 10 जवान और 12 लोग घायल

रांची का नगड़ी इलाका रविवार को सुबह 9 बजे से शाम 4.30 बजे तक रणक्षेत्र में तब्दील रहा। जिला प्रशासन ने रिम्स-2 की विवादित भूमि पर ग्रामीणों का आंदोलन को रोकने के लिए सुबह से ही छह जगह बैरिकेडिंग कर दी थी। पैदल चलने तक की अनुमति नहीं थी। फिर भी करीब दो हजार ग्रामीण पगडंडियों और वैकल्पिक रास्तों से होकर विवादित स्थल तक पहुंच गए। उन्होंने ‘हल जोतो, रोपा रोपो’ कार्यक्रम के तहत हल चलाया और धन की रोपाई की। धन रोपनी के दौरान पुलिस ने ग्रामीणों को वहां से हटने को कहा। पर वे नहीं हटे। इसके बाद पुलिस ने सख्ती शुरू की। ग्रामीण उग्र हो गए और पुलिस टीम पर हमला कर दिया। आक्रोशित ग्रामीणों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद लाठीचार्ज किया। इस झड़प में एडीएम लॉ एंड ऑर्डर, सिल्ली डीएसपी, कांके सीओे, कांके थानेदार, 10 पुलिसकर्मी और एक दर्जन ग्रामीण घायल हो गए हैं। सभी को रिम्स और सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इधर, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को रविवार सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस ने उनके घर पर ही हाउस अरेस्ट कर लिया। घर के चारों ओर पुलिस का पहरा लगा दिया गया था। उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया गया। शाम 5:30 बजे पुलिस ने घर से पहरा हटाया। रिम्स-2 की प्रस्तावित जमीन पर धान रोपने आए ग्रामीणों की पुलिस से झड़प हो गई। हमले के बाद पुलिस ने छोड़े 16 आंसू गैस के गोले, लाठीचार्ज भी नगड़ी में करीब आठ घंटे आमने-सामने रहे ग्रामीण व पुलिस बल 6 जगह बैरिकेडिंग, ग्रामीण फिर भी पहुंचे रिम्स-2 की जमीन पर लाठी-डंडा, तीर-धनुष जैसे पारंपरिक हथियार के साथ पहुंचे थे आंदोलनकारी 200 मीटर में ​थी निषेधाज्ञा, पर 7 किमी में रहा अघोषित कर्फ्यू, 1200 जवान भी नहीं रोक सके लोगों का विरोध : पढ़ें रांची फ्रंट पेज सुबह से ही कांके-पतरातू रोड, नगड़ी-कांके रोड और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस का भारी जमावड़ा लगा रहा। प्रचार वाहन से बार-बार अनाउंसमेंट किया जाता रहा कि विवादित स्थल के 200 मीटर दायरे में निषेधाज्ञा लागू है। पांच से ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकते। इसके बावजूद ग्रामीण अफसरों व पुलिस बल को चकमा देते हुए खेत तक पहुंच गए। ग्रामीण हाथों में लाठी-डंडा, तीर-धनुष जैसे पारंपरिक हथियार लिए हुए थे। प्रशासन ने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की, मगर सैकड़ों की संख्या ग्रामीण में आगे बढ़ गए। पुलिस-प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच आठ घंटे तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। चंपाई ने कहा… किसान आंदोलन से डरी सरकार चंपाई ने कहा कि नगड़ी के किसान आंदोलन से राज्य सरकार डर गई है। वहां के आदिवासी/ मूलवासी किसानों की हक की आवाज उठाने से रोकने के लिए मुझे हाउस अरेस्ट कर लिया गया। रांची आ रही सैकड़ों गाड़ियों को रास्ते में जबरन रोका गया। इसके बावजूद नगड़ी किसान आंदोलन सफल रहा। प्रशासन के दमनात्मक रवैये और आंसू गैस के गोलों के बीच सैकड़ों माताएं, बहनें और किसान खेतों में उतरे। हल चलाया और धान रोपा। प्रशासन ने चंपाई के पुत्र बाबूलाल सोरेन को भी तमाड़ में रोक लिया गया था।

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