डिजिटल रिकार्ड से इलाज में आसानी, रिम्स में 2.37 लाख व सदर अस्पताल में 1.28 लाख लोगों ने बनवाया आभा कार्ड

झारखंड के लोग अब स्वास्थ्य के मामले में डिजिटली भी आगे बढ़ रहे हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत लोगों का आभा कार्ड बनाया जा रहा था। इसके लिए अस्पताल आकर उन्हें खुद से आभा पोर्टल में रजिस्टर्ड होकर आभा कार्ड नंबर जेनरेट करना होता है। राजधानी का सदर अस्पताल इसमें भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। एक आंकड़े के अनुसार, सदर अस्पताल में अब तक 1,28,808 लोगों ने आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) कार्ड के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया है। वहीं, रिम्स में 2,37,200 लोगों ने आभा कार्ड बनवा लिया है। यह पहल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना है। इतना ही नहीं, इससे देश के किसी भी हिस्से में इलाज के दौरान मरीज की पूरी ट्रीटमेंट हिस्ट्री एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। बता दें कि सदर अस्पताल में 13,123 मरीज अब डिजिटल मोड पर इलाज की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। पेपरलेस इलाज के कारण इन्हें अपने कागजात कहीं भी लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ती है। एक साल में आभा कार्ड रजिस्ट्रेशन में काफी तेजी आई है। एम्स देवघर व रिम्स में रजिस्ट्रेशन अधिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, यह बदलाव पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है। अन्य मेडिकल कॉलेजों और हॉस्पिटल में भी व्यापक पैमाने पर रजिस्ट्रेशन हो रहा है। एम्स देवघर में सबसे ज्यादा 2,90,616, रिम्स रांची में 2,37,200, पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज धनबाद में 1,54,238 और हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में 1,43,305 लोगों ने भी आभा कार्ड बनवा लिए हैं। लंबी कतार से मिल रहा छुटकारा मरीज का डेमोग्राफिक डाटा सीधे अस्पताल के सिस्टम में चला जाता है और ओपीडी कार्ड के लिए टोकन नंबर जेनरेट होता है, जो मरीज के मोबाइल पर भेजा जाता है। इस प्रक्रिया से मैनुअल डेटा एंट्री की जरूरत लगभग खत्म हो गई है, जिससे लंबी कतार और भीड़भाड़ में कमी आई है। मरीज तय स्लॉट में ओपीडी में बुलाए जाते हैं, जिससे इलाज में पारदर्शिता आई है। पांच साल के ऊपर के मरीजों का बन सकता है कार्ड आभा कार्ड बनाने के लिए 5 साल या उससे अधिक उम्र के सभी व्यक्ति पात्र हैं। यह एबीडीएम के दो अहम हिस्सों ‘स्कैन एंड शेयर’ और हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम पर आधारित है। इसके तहत मरीज अस्पताल के क्यूआर कोड को स्मार्टफोन से स्कैन कर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। मरीज का डिजिटल रिकार्ड रखा जा रहा, एक क्लिक में हिस्ट्री

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