भास्कर न्यूज | सरायकेला महिला महाविद्यालय, सरायकेला में इतिहास विभाग की ओर से सामाजिक सुधार के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में महाविद्यालय के प्राचार्य स्पार्कलिंन देई उपस्थित थे। उन्होंने सामाजिक सुधार के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि छुआछूत, बाल विवाह व महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त करने में उनके प्रयास सकारात्मक रहे हैं। उन्होंने शिक्षा को एक ऐसा माध्यम माना जिनको ग्रहण करने के बाद जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने छात्राओं को कहा कि खुद के अंदर छिपी हुई प्रतिभा को निखारने और साथ में स्वयं शिक्षित होकर समाज को भी साक्षर बनाने का कार्य करें। इस अवसर पर इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ. चंद्रशेखर ने भी सावित्रीबाई फुले की जीवनी व सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों को बताया। उन्होंने छात्राओं को कहा कि आज वर्तमान में हमारे देश में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, यह उन्हीं का योगदान है। उन्होंने छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि हर हाल में शिक्षा को पूर्ण कर एक बेहतर समाज के गठन में अपना योगदान दें। अंग्रेजी विभाग के शिक्षक डॉ. राजेश कुमार मंडल ने भी अपने विचारों को साझा किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं की स्थिति पहले से कई गुना बेहतर हो चुकी है। छात्राओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा िक सावित्रीबाई फुले की जीवनी से सीख लेते हुए छात्रों को आगे बढ़ना चाहिए। वहीं, राजनीतिक विभाग की शिक्षिका चंपा पोल ने अपना विचार रखा। उन्होंने कहा कि भारत की प्रथम महिला शिक्षिका को महिलाओं की स्थिति को सुधारने में सबसे बड़ी सुधारक माना जाता है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि उन्हें ज्ञान अर्जित कर अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहिए। इस अवसर पर महाविद्यालय की छात्रा सोमवारी सोय, संध्यावती सरदार, प्रीति गोंदुवा, सोनिया हेंब्रम, पुष्पा डिग्गी व प्रतिमा परिहारी ने भी अपने विचार रखे। मंच संचालन इतिहास विभाग के छात्र निरुण सिंह ने िकया। मौके पर भूगोल विभाग की शिक्षिका प्रेम नूतन गाड़ी, हिंदी विभाग की शिक्षिका डॉक्टर श्वेतलता व महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित थीं।


