भास्कर न्यूज | संगम कोयलीबेड़ा ब्लॉक के लक्ष्मीपुर पंचायत में सरकारी योजनाएं कागजों तक सिमटी हैं। पंचायत मुख्यालय लक्ष्मीपुर, पीवी-73 में दो आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत बेहद खराब है। चार साल से इनके भवन अधूरे हैं। न पंचायत प्रतिनिधि ध्यान दे रहे, न प्रशासनिक अफसर। महिला बाल विकास विभाग भी आंख मूंदे बैठा है। सरपंच और सचिव की लापरवाही से बच्चों का भविष्य अंधेरे में है। विभाग और पंचायत की उदासीनता ने बच्चों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर दिया है। लक्ष्मीपुर के आजाद पारा में 37 बच्चे हैं। भवन नहीं होने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरस्वती बाला अपने घर से केंद्र चला रही हैं। शीतला पारा में 22 बच्चों के लिए कार्यकर्ता नीलिमा मंडल ने खुद झोपड़ी बनाकर केंद्र शुरू किया है। बच्चों की पढ़ाई और पोषण झोपड़ी और अस्थायी केंद्रों तक सीमित रह गई है। आजाद पारा में भवन और आहाता निर्माण के लिए 8 लाख स्वीकृत हुए थे। इनमें से 3 लाख की राशि निकाली जा चुकी है। शीतला पारा के लिए 6.45 लाख मंजूर हुए। इसमें से भी 3 लाख निकाले जा चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य अब तक नींव तक ही पहुंच सका है। निर्माण में शासन के निर्देशों की अनदेखी हो रही है। सरपंच और सचिव से कई बार मांग कर चुके: नीलिमा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नीलिमा मंडल और सरस्वती बाला ने बताया उन्होंने कई बार सरपंच और सचिव से भवन की मांग की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने भी कई बार अधिकारियों को जानकारी दी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।


