चावल ही नहीं, बीजापुर से आने वाला धान भी सड़ा

भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा गीदम वेयर हाउस में 30 हजार ​क्विंटल चावल सड़ने के बाद अब बीजापुर जिले के 7 संग्रहण केंद्रों में धान सड़ाने का मामला भी सामने आ रहा है। यह धान दंतेवाड़ा जिले को ही भेजा जाना था, लेकिन आज इस धान की हालत इतनी खराब है कि कस्टम मिलिंग संभव नजर नहीं आता। बुरी तरह सड़ चुके इस धान की कीमत 4 करोड़ रुपए बताई जा रही है। समय पर कस्टम मिलिंग के लिए न जाने और रख-रखाव के अभाव में पूरे धान में कीड़े लग गए हैं। इस धान की गुणवत्ता इतनी ज्यादा खराब है कि अब मिलिंग प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हैं। कुल मिलाकर, दंतेवाड़ा और बीजापुर में धान–चावल प्रबंधन की लापरवाही से करोड़ों का नुकसान और पीडीएस प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। मिलर्स पर कार्रवाई न होना और निलंबित अधिकारी का गोदाम में सक्रिय रहना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मिलीभगत से खपाया गया घटिया क्वालिटी का चावल : जिले में पिछले वर्ष खरीदे गए धान की मिलिंग के बाद गीदम वेयरहाउस में रखे गए चावल की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आरोप है कि क्वालिटी इंस्पेक्टर और कुछ मिलर्स की मिलीभगत से जिले में एक साल से घटिया क्वालिटी का चावल खपाया जा रहा था। दंतेवाड़ा में पिछले वर्ष 3 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हुई थी। इसी धान को मिलर्स ने मिलिंग कर गीदम वेयरहाउस में पहुंचाया, लेकिन निरीक्षण में चावल की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। दंतेवाड़ा और गीदम में ऋषभ राइस मिल का चावल बड़ी मात्रा में खराब पाया गया है। हितग्राही इसे लेने से मना कर चुके हैं। वेयरहाउस में वर्तमान में लगभग 30 हजार क्विंटल चावल की सफाई जारी है, जिसे तीन दिनों में सुधारकर फिर से क्वालिटी जांच कराने की तैयारी है। चावल खाने योग्य है या नहीं, ये फैसला क्वालिटी इंस्पेक्टर की रिपोर्ट पर लिया जाएगा। रिपोर्ट ठीक आने पर यही चावल दोबारा पीडीएस दुकानों में भेजा जाएगा। बीजापुर में भी 4 करोड़ का धान सड़ता रहा क्योंकि उठाव रुका रहा। सबसे गंभीर बात यह है कि 20 से अधिक मिलर्स का चावल खराब पाया जा चुका है, लेकिन नान (मार्कफेड/नान विभाग) द्वारा अब तक किसी भी मिलर को नोटिस जारी नहीं किया गया है। जबकि खराब चावल रखवाने वाले दो जिम्मेदारों वेयरहाउस प्रभारी और क्वालिटी इंस्पेक्टर को निलंबित जरूर किया गया है, पर निलंबन के बावजूद प्रभारी अभी भी गोदाम में ताला लगाकर चावल की सफाई में लगे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, इसे गुणवत्ता सुधार के नाम पर सेटिंग कर मामले को दबाने की कोशिश माना जा रहा है।

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