चाहुंदा है पंजाब, मुड़ चलिए शिखरां वल

भास्कर न्यूज | जालंधर केएल मेमोरियल हॉल में पंचनद शोध संस्थान की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया। इस का विषय चाहुंदा है पंजाब, मुड़ चलिए शिखरां वल रखा गया। जिस पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस के साथ पंचनद शोध संस्थान के कंकेश गुप्ता ने राज्य के गिरते प्राकृतिक संसाधनों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि पंजाब को फिर से ‘नंबर वन’ बनाना है, तो हमें गिरते जल स्तर और घटती वनस्पति को बचाने के लिए काम करना होगा। उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण की सुरक्षा ही राज्य की प्रगति का आधार है। वहीं, पद्मश्री हरमोहिंदर बेदी के अनुसार, सांप्रदायिक सद्भाव और गहरे आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से ही पंजाब को दोबारा ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. जगदीश सिंह ने पंजाब के सामने खड़ी सामाजिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि वर्तमान में ‘अलगाववाद’ एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। उन्होंने पहले अंग्रेजी भाषा को नौकरी और सम्मान का आधार बनाकर तरजीह दी गई, जिससे ‘वैस्टर्नाइजेशन’ को बढ़ावा मिला। प्रो. सिंह के अनुसार, इसी सांस्कृतिक भटकाव के कारण आज पंजाब कई नई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिससे निपटने के लिए अपनी जड़ों की ओर लौटना जरूरी है।

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