चित्तौड़गढ़ में मंगलवार से स्वदेशी मेले की विधिवत शुरुआत हो गई। मेले का उद्घाटन राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े और पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक आचार्य बालकृष्ण ने किया। उद्घाटन समारोह में श्रीयादे माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद राय टांक, सहकारिता मंत्री गौतम दक, सांसद सीपी जोशी, चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या, निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी और कपासन विधायक अर्जुन लाल जीनगर भी मौजूद रहे। आयोजन को लेकर शहर में खासा उत्साह देखने को मिला। स्वदेशी मेला चित्तौड़गढ़ के लिए गौरव, राज्यपाल ने सराहा आयोजन राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने मेले के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर द्वारा किया गया यह प्रयास प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से यहां स्टॉल लगे हैं, जहां लोग खरीदारी भी कर सकते हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देख सकते हैं। राज्यपाल ने इसे चित्तौड़गढ़ के लिए गौरव का विषय बताया और कहा कि स्वदेशी उत्पादों से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। भारतीय संसाधनों से बने उत्पाद ही असली स्वदेशी, राज्यपाल का संदेश राज्यपाल ने कहा कि जो उत्पाद भारत के कच्चे माल, भारतीय श्रमिकों और भारतीय पूंजी से बनते हैं, वही वास्तव में स्वदेशी हैं। ऐसे उत्पादों से रोजगार भी देश में ही रहता है और जीएसटी का लाभ भी देश को मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि गुणवत्ता अच्छी हो और दाम उचित हों तो विदेशी उत्पादों की मांग अपने आप कम हो जाती है, जैसा पहले कई क्षेत्रों में देखने को मिला है। स्वदेशी भावना ही आत्मनिर्भर भारत की असली ताकत आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वदेशी केवल एक विचार नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में भारतीय संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वदेशी का संकल्प है। राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का बड़ा प्रयास है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना स्वदेशी के बिना पूरा नहीं हो सकता। देशभर से आए कारीगर, स्वदेशी एकता की दिखी मजबूत तस्वीर आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि मेले में उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर से हिमाचल प्रदेश तक के कारीगर अपने उत्पादों के साथ पहुंचे हैं। यह स्वदेशी की ताकत और एकता को दिखाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कम से कम जीरो तकनीक वाले उत्पादों में विदेशी सामान का इस्तेमाल न करें और स्वदेशी अपनाने का संकल्प लें। शोभायात्रा से दिया गया स्वदेशी का संदेश, दिखी पारंपरिक झलक मेले से पहले शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। घोड़े, ऊंट और बैलगाड़ियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पहले लोग स्वदेशी साधनों का ही उपयोग करते थे। शोभायात्रा में महिलाएं, बालिकाएं और पुरुष डीजे की धुन पर नाचते-गाते नजर आए। इस दौरान स्कूली बच्चे और स्काउट-गाइड भी बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया।


