छतरपुर जिला जेल में कैदियों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। जेल परिसर के अंदर का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें सामान पहुंचाने और सुविधाएं देने के बदले तय रकम वसूले जाने के आरोप लगाए गए हैं। वीडियो के सामने आते ही जेल विभाग हरकत में आया है और डीआईजी जेल अखिलेश तोमर ने देर शाम जिला जेल का निरीक्षण किया। क्या है वायरल वीडियो में दावा
वायरल वीडियो में जेल कैंटीन में बैठी महिला जेल प्रहरी पुष्पा अहिरवार पर आरोप लगाया गया है कि वह जेलर की एजेंट की तरह काम कर रही हैं। वीडियो में कथित तौर पर यह सुनाई देता है कि जेल के अंदर गुटखा, बीड़ी से लेकर अन्य कामों के लिए अलग-अलग रेट तय हैं। वीडियो में एक युवक महिला प्रहरी से हाथ जोड़कर पैसों को लेकर मोलभाव करता दिख रहा है। एक अन्य दृश्य में पैसे लेने के बाद महिला प्रहरी उन्हें अपने बैग में रखती नजर आती हैं। अब देखिए, वायरल वीडियो के दो अंश… हर काम का तय रेट होने का आरोप
वायरल वीडियो और आरोपों के अनुसार- नए कैदियों से झाड़ू न लगाने और शौचालय में पानी न डालने के बदले 5 हजार रुपए लिए जाते हैं। गुटखा या बीड़ी का एक बंडल 250 रुपए में दिया जाता है। कैंटीन का सामान एमआरपी से 50% अधिक दर पर बेचे जाने का आरोप है। नामदार या सरकारी कर्मचारियों से 10 हजार से 50 हजार रुपए तक वसूली की बात कही गई है। पैसे न देने पर कैदियों से मारपीट करवाने के भी आरोप लगाए गए हैं। जेल प्रशासन की कार्रवाई: DIG पहुंचे जांच पर
मामले की जानकारी मिलते ही जेल डीआईजी अखिलेश तोमर देर शाम छतरपुर जिला जेल पहुंचे और निरीक्षण किया। विभागीय स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल वीडियो की सत्यता और समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। जेलर बोले-वीडियो 4–5 माह पुराना
जिला जेल छतरपुर के जेलर दिलीप सिंह जाटव ने बताया कि वायरल वीडियो 4–5 महीने पुराना है और गर्मियों के समय का बताया जा रहा है। उनके अनुसार, महिला प्रहरी कैंटीन के पैसे ले रही थी, क्योंकि कैदी कैंटीन में तय राशि जमा कर सामान ले सकते हैं। जेलर ने बताया कि पहले एक कैदी को महीने में 1500 रुपए जमा करने की अनुमति थी, जिसे अब बढ़ाकर 2000 रुपए किया गया है। इसी व्यवस्था के तहत सामान दिया जाता है। ब्लैकमेलिंग का दावा भी सामने आया
जेलर के अनुसार, एक पूर्व बंदी (चौरसिया नामक व्यक्ति) महिला प्रहरी को लगातार कॉल कर धमकी दे रहा था कि वीडियो वायरल कर देगा। महिला प्रहरी का दावा है कि उसने उसे ब्लॉक कर दिया था, इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। 10 साल से जेल में पदस्थ प्रहरी
पुष्पा अहिरवार वर्ष 2014–15 से जेल प्रहरी के पद पर पदस्थ हैं और पिछले 6–7 महीनों से कैंटीन की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। आरोप है कि उन्हें जेलर का संरक्षण प्राप्त था, हालांकि जेल प्रशासन ने इसे निराधार बताया है। जांच जारी, अभी कोई निष्कर्ष नहीं जेल विभाग का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बना, रकम वसूली वैधानिक थी या अवैध। वीडियो अब जाकर क्यों वायरल हुआ? जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


