छतरपुर जिले के लवकुशनगर स्थित अपर सत्र न्यायालय ने अपहरण के एक मामले में दो आरोपियों देवेंद्र सिंह और प्रमोद सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला पैसों के लेन-देन और जमीन की रजिस्ट्री को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर आजीवन कारावास के साथ-साथ 2000-2000 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन के अनुसार, घटना 11 मई 2019 की दोपहर करीब 3 बजे की है। आरोपी देवेंद्र सिंह, उसका भाई प्रमोद सिंह और दो अन्य व्यक्ति एक सफेद चार पहिया वाहन से फरियादी रामलखन के घर पहुंचे। फाटक खुला होने का फायदा उठाकर वे घर में घुस गए और मुन्ना उर्फ देवीप्रसाद अग्निहोत्री को जबरन पकड़कर गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गए। रजिस्ट्री होने पर ही छोड़ने की धमकी दी ग्राम खुड़ेरी निवासी रामलखन ने जुझारनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि बड़े भाई मुन्ना ने देवेंद्र सिंह से जमीन की रजिस्ट्री के लिए पैसे लिए थे। रजिस्ट्री न होने और पैसे वापस न मिलने पर विवाद चल रहा था। अपहरण के वक्त परिजनों ने पूछताछ की तो आरोपियों ने कहा कि जब जमीन की रजिस्ट्री हो जाएगी, तभी मुन्ना को छोड़ेंगे। घटना के समय गांव के मोहन सिंह, दद्दू सिंह और उज्जवल सिंह मौके पर मौजूद थे। जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा गया मामला देहाती नालशी के आधार पर जुझारनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने विवेचना के दौरान अपहृत देवीप्रसाद को बरामद कर लिया। जांच में आरोपियों के मेमोरेंडम कथन लिए गए, उनकी संपत्ति जब्त की गई और शिनाख्त परेड कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय समिति ने इसे जघन्य एवं सनसनीखेज अपराध की श्रेणी में रखा था। इन धाराओं में हुई सजा मामले की विवेचना उपनिरीक्षक सुखेंद्र सिंह परिहार ने की। विशेष लोक अभियोजक किशोरी लाल प्रजापति ने न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए। अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अरशद ने दोनों आरोपियों को धारा 364 क के तहत आजीवन कारावास, धारा 347 में 1 वर्ष, धारा 450 में 4 वर्ष और धारा 365 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट के इस फैसले को जिले में अपहरण और जमीन विवाद से जुड़े मामलों में सख्त संदेश माना जा रहा है।


