मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए एक ज्ञापन में जिले के आरटीओ कार्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं और कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले 10 महीनों से छिंदवाड़ा आरटीओ कार्यालय में स्थायी आरटीओ की नियुक्ति नहीं हुई है। तत्कालीन आरटीओ मनोज तेहनगुनिया के स्थानांतरण के बाद बैतूल में पदस्थ आरटीओ अनुराग शुक्ला को छिंदवाड़ा और पांढुरना दोनों जगहों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया, जिसके बाद से पूरा कामकाज प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है। सप्ताह में एक-दो दिन ही आते हैं प्रभारी आरटीओ ज्ञापनकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आरटीओ अनुराग शुक्ला सप्ताह में सिर्फ एक या दो दिन कुछ घंटों के लिए ही छिंदवाड़ा कार्यालय पहुंचते हैं, जिसके चलते कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बताया गया कि सीमित समय में कामों का दबाव इतना अधिक रहता है कि अधिकारी पर ‘प्रेशर क्रिएट करने वाले’ लोग मनमर्ज़ी से काम करवाते हैं। वसूली का काम प्राइवेट लोगों के हवाले ज्ञापन के अनुसार, आरटीओ कार्यालय में वसूली का पूरा सिस्टम आरटीओ के कर्मचारियों द्वारा रखे गए प्राइवेट बाबुओं के हाथों में सौंप दिया गया है। किसी भी काम के लिए आवेदकों को पहले दो प्राइवेट व्यक्तियों—अनुज और हरि से मिलने को कहा जाता है।आरोप यह भी है कि ये दोनों व्यक्ति पैसे मिलने की पुष्टि प्रत्यक्ष रूप से आरटीओ अनुराग शुक्ला को करते हैं, तभी फाइल आगे बढ़ती है। बिना पैसे लिए फाइल आगे नहीं बढ़ती ऑफिस में लोगों के वाहन संबंधी काम जैसे फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस, लाइसेंस रिन्यूअल, परमिट जारी करना गुड्स वाहन परमिट सरेंडर आदि सभी कार्य तय राशि के बिना आगे नहीं बढ़ते। ज्ञापन में ये भी आरोप लगाया गया है कि प्रभारी आरटीओ अनुराग शुक्ला ने इस मामले में “पुराने सभी रिकॉर्ड नष्ट कर दिए हैं” और बिना पैसे कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ पाती है। कलेक्टर ऑफिस की मीटिंग में भी पहुंचते हैं प्राइवेट लोग ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि आरटीओ कार्यालय में काम करने वाले ये प्राइवेट लोग कलेक्टर कार्यालय में आयोजित होने वाली साप्ताहिक बैठकों में भी ऑफिस की जानकारी प्रस्तुत करते हैं, जबकि अधिकांश अधिकारियों को यह तक पता नहीं होता कि ये लोग नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि कर्मचारियों द्वारा रखे गए प्राइवेट बाबू हैं। प्रशासन अब तक नहीं पकड़ पाया सच ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन आज तक इन अनियमितताओं को पकड़ने में नाकाम रहा है। उन्होंने मांग की है कि छिंदवाड़ा में स्थायी आरटीओ की जल्द नियुक्ति, वसूली में शामिल प्राइवेट व्यक्तियों की जांच और पूरे मामले में उच्च स्तरीय कार्रवाई की जाए। अनुराग शुक्ला का पक्ष जानने की कोशिश हुई नाकाम इस पूरे मामले में जब प्रभारी आरटीओ अनुराग शुक्ला का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्हें फोन पर संपर्क किया गया। लगातार तीन बार कॉल करने के बाद भी उन्होंने फोन अटेंड नहीं किया। उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने से यह सवाल और मजबूत हुआ कि शिकायतकर्ताओं की यह बात सही है कि वे फोन उठाने में भी लापरवाही बरतते हैं।


