रांची में कड़ाके की ठंड के साथ ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स और पांच प्रमुख निजी अस्पतालों में इस समय 85 से अधिक ब्रेन स्ट्रोक व ब्रेन हेमरेज के मरीज भर्ती हैं। इनमें सबसे अधिक 36 मरीज रिम्स में इलाजरत हैं, जिनका न्यूरोलॉजी विभाग और आईसीयू में उपचार चल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। भर्ती मरीजों में करीब 30 प्रतिशत की उम्र 45 वर्ष से कम है। 32, 36 और 38 वर्ष जैसे युवा भी ब्रेन स्ट्रोक व हेमरेज का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड में लापरवाही, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और जीवनशैली में बदलाव इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं। रिम्स के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 1332 मरीज ब्रेन स्ट्रोक व हेमरेज के इलाज के लिए पहुंच चुके हैं, जबकि ठंड के मौसम में इन मामलों में उछाल देखा जा रहा है। सदर अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. शुभम शेखर के अनुसार, अचानक सिर में तेज दर्द, चेहरे या शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन, बोलने में परेशानी, मुंह टेढ़ा होना या हाथ-पैर में कमजोरी महसूस होना ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक दो प्रकार के होते हैं-इस्केमिक और हेमोरेजिक स्ट्रोक। डॉ. शुभम शेखर पिछले सात दिनों में ही रिम्स और सदर अस्पताल में ब्रेन स्ट्रोक के 40 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें 10 से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि देर से अस्पताल पहुंचने के कारण कई मामलों में मरीजों को बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों के अनुसार, लक्षण दिखते ही गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से मरीज को लकवे या गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है।


