जन्म-मृत्यु पंजीयन में नोटरी सत्यापन की व्यवस्था खत्म:ग्रामीण इलाकों में अब ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी जारी कर सकेंगे प्रमाण पत्र

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ग्रामीण या शहरी क्षेत्र के लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए अधिनियम में संशोधन किया गया है। इसमें पंजीयन में देरी के मामलों में नोटरी सत्यापन की व्यवस्था भी खत्म कर दी गई है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में अब ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी भी प्रमाण पत्र जारी कर सकेंगे। साथ ही पंजीयन में देरी पर जुर्माना राशि भी बढ़ाई गई है। 7 फरवरी को जारी हुए नए नियम कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम में संशोधन की अधिसूचना 7 फरवरी को जारी इन संशोधन को लागू भी कर दिया गया है। इसके तहत अब जन्म और मृत्यु के 30 दिन के बाद व 1 वर्ष के भीतर के मामलों में ग्रामीण क्षेत्र में प्रमाण पत्र संबंधित ब्लॉक सांख्यिकी अधिकारी द्वारा जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि अब जन्म-मृत्यु के विलम्बित रजिस्ट्रीकरण में नोटरी सत्यापन को समाप्त कर दिया गया है। साथ ही अपील का प्रावधान किया गया है। यदि आवेदन संबंधित रजिस्ट्रार, जिला रजिस्ट्रार से संतुष्ट नहीं है, तो वे उच्च स्तर पर अपील भी कर सकेंगे। इसी तरह, वर्तमान में जन्म या मृत्यु की घटना की सूचना 21 दिवस बाद तथा 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो 20 रुपए विलम्ब शुल्क लगेगा। वहीं, यदि घटना की सूचना 30 दिन बाद तथा एक वर्ष के भीतर दी जाती है, तो 50 रुपए विलम्ब शुल्क देना होगा। साथ ही एक साल बाद दी गई सूचना के मामले में 100 रुपए विलम्ब शुल्क लगेगा। हॉस्पिटलों ने देरी की तो 1000 रुपए तक पेनल्टी कलेक्टर अग्रवाल ने बताया कि चिकित्सा संस्थानों द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन 21 दिन से ज्यादा देरी करने या सूचना समय पर नहीं देने पर पूर्व में 50 रुपए की पेनल्टी का प्रावधान था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 250 रुपए से 1000 रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि अब तक चिकित्सा संस्थानों में जन्म-मृत्यु के मामलों में बरती जाने वाली लापरवाही के परिणामस्वरूप लोगों को समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिल पाते थे।

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