जमीन हड़पने, मकान विवाद के केसों की पड़ताल:दुष्कर्म-छेड़छाड़ के 48 प्रतिशत मामले झूठे, निजी रंजिश और संपत्ति विवाद बने कारण

महिलाओं के विरुद्ध दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों को लेकर कानून में सख्त सजा के प्रावधान हैं, लेकिन रेंज के हालिया आंकड़े एक गंभीर और चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर इशारा कर रहे हैं। लोग निजी रंजिश का बदला लेने और किसी प्रकार के लालच के चलते भी दुष्कर्म के कई झूठे मामले दर्ज कराए जा रहे हैं। जमीन हड़पने, मकान के विवाद या आपसी विवादों में सामने वाले पक्ष को फंसाने के लिए इन गंभीर धाराओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। वर्ष 2025 में दर्ज दुष्कर्म के मामलों में से आधे से अधिक प्रकरण जांच के बाद झूठे पाए गए हैं। कुल दर्ज मामलों में 48 प्रतिशत केस ‘एफआर झूठ’ की श्रेणी में आए। वर्ष 2025 में रेंज के अंतर्गत दुष्कर्म के कुल 669 प्रकरण दर्ज किए गए। पुलिस द्वारा की गई गहन और तकनीकी जांच के बाद इनमें से 317 मामलों को झूठा घोषित किया गया। जांच में सामने आया कि कई मामलों में निजी रंजिश, जमीन या मकान विवाद, आपसी दुश्मनी और लालच के चलते गंभीर धाराओं का दुरुपयोग किया गया। वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में दुष्कर्म के कुल मामलों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में जहां 708 प्रकरण दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या 5.5 प्रतिशत की कमी के साथ 669 रह गई है। ऐसे में पुलिस जांच में ऐसे मामलों को पूर्णत: झूठा मानते हुए इनमें एफआर लगा दी गई। 669 में से 317 मामले जांच में झूठे निकले केस-1 सेवर थाने में जनवरी 2025 में परिवादी द्वारा दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया। जांच में यह मामला परिवादी द्वारा जमीन हड़पने के लालच में अपने जेठ के विरुद्ध दर्ज कराया था,जिसमें पुलिस जांच के बाद एफआर दी गई। केस-2 थाना कोतवाली में अप्रैल 2025 में परिवादी ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया। जांच में यह मामला मकान के विवाद का निकला। जांच के बाद इस मामले में एफआर दी गई। केस-3 थाना रूपवास में परिवादी ने जून 2025 में अपने परिवारजनों के विरुद्ध दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया। जांच में यह मामला खेत की मेढ़ के विवाद का निकला। जिसमें पुलिस जांच के बाद एफआर दी गई। धारा 182 और 211 में पुलिस करें कार्रवाई : सिंह दुष्कर्म का झूठा आरोप बेकसूर के लिए पीड़ादायक होता है। इससे सामाजिक अपमान, मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। पुलिस को धारा 182 और 211 के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। कार्रवाई न होने से ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ता है और कानून का दुरुपयोग होता है। इसके साथ ही पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत दी गई सहायता राशि को जब्त की जानी चाहिए। भास्कर एक्सपर्ट – देवेंद्र पाल सिंह, कानून विशेषज्ञ “दुष्कर्म मामलों की जांच के बाद जो प्रकरण झूठे मिले उनमें एफआर लगाई गई है। पुलिस की प्राथमिकता निष्पक्ष जांच और पीड़ित को न्याय दिलाना और दोषियों पर कार्रवाई करना है।”
-कैलाशचंद्र विश्नोई, आईजी, भरतपुर रेंज रेंज के जिलों में कुल दर्ज प्रकरणों की स्थिति

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