जमुआ की 8 खदानों में से 5 अवैध िजसकी लीज खत्म वहां भी खनन

भास्कर न्यूज|गिरिडीह/जमुआ जमुआ प्रखंड क्षेत्र अवैध पत्थर खनन का केंद्र बन चुका है। यहां कई इलाकों में अवैध पत्थर खदान खुलेआम संचालित हो रही हैं। वहीं, जिन खदानों की लीज है, वहां नियमों का पालन नहीं िकया जा रहा। न पर्यावरण का ध्यान रखा जा रहा है और न ही सुरक्षा का। जैसे-तैसे पत्थर निकालकर धंधेबाज कारोबार चला रहे हैं। धुरगड़गी पंचायत में दो माइंस दलिया व तेलमकरी में है। यहां तो बीच नदी पर पत्थर डालकर धंधेबाजों ने अस्थायी सड़क बना ली है। वहीं, दलिया में गलत का विरोध कर रहे ग्रामीणों को रोकने लिए धंधेबाज ने आधे दर्जन से अधिक बाउंसर को तैनात कर रखे हैं। जबकि, लताकी व नावाडीह में जिस माइंस की लीज 2020 में ही खत्म हो चुकी है, वहां भी रात-दिन अवैध रूप से खनन चल रहा है। इस गोरखधंधे में वहां के पंचायत प्रतिनिधि ही शामिल हैं। नावाडीह में अवैध खनन के विरुद्ध जिला खान इंस्पेक्टर ने जमुआ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, बावजूद कोई फर्क नहीं पड़ा और रात के अंधेरे में पत्थर का खनन जारी है। दस्तावेजों के अनुसार जमुआ के छह गांवों में 8 पत्थर माइंस संचालित हैं, इनमें से 5 अवैध हैं, जहां नियमों को ताक पर रखकर पत्थरों की खुदाई की जा रही है। जबकि, वैध खदानों में ब्लास्टिंग व सुरक्षा के नियमों का खुला उल्लघंन हो रहा है। इतना ही नहीं लीज एरिया से दूर धंधेबाज पत्थरों की खुदाई कर रहे हैं। ब्लास्टिंग के वक्त मैट का इस्तेमाल नहीं होने से पत्थरों का टुकड़ा उड़कर घरों तक पहंुच रहा है, जो आस-पास के खेतों में जमा हो रहा है। जिससे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। कई घरों में दरारें पड़ने लगी हैं। पत्थर खदान से निकलने वाले हाइवा की वजह से गांव की सड़क भी बर्बाद हो गई है। यहां गोविंदपुरा में 2, नावाडीह में 1, लताकी में 3, दलिया में 1, तेलमकरी में 1 और बदडीहा में 1 पत्थर का खदान संचालित है। जिसमें खनन विभाग के सूची के चार खदान संचालित है बाकी खदानों अवैध है, लेकिन खनन विभाग अंजान बना हुआ है। केस स्टडी-3 – गोविंदपुरा में ब्लास्टिंग से घरों की दीवारों में दरार जमुआ के गोविंदपुरा गांव में चल रही पत्थर खदान से ग्रामीण भयभीत हैं। खदान से घरों की दूरी मात्र 100 मीटर है। शाम में ब्लास्टिंग जब होती है तो पत्थर घरों में घुस जाता है। गांव के लोकनाथ यादव, कार्तिक यादव, चिंतामनी यादव के घरों मंे दरार पड़ गए है। जबकि, पत्थर से एस्बेस्टर्स शीट टूट गई है। सिकंदर वर्मा, प्रमोद यादव, रीतलाल यादव, छकनी देवी, प्यासी देवी, शोभा देवी ने बताया कि बगैर सूचना के ब्लास्टिंग हर दिन शाम के 6-7 बजे के बीच होती है। घरों मंे कंपन होने लगता है। कई बार पत्थर से लोग घायल भी हो चुके हैं। शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती है। केस स्टडी – 1- बदडीहा से पत्थर भेजे जा रहे कोडरमा जमुआ के ही बदडीहा मंे एक पत्थर खदान अवैध चल रही है। खदान से दिन और रात में पत्थरों की तोड़ने और उसे हाइवा से कोडरमा के डोमचांच भेजा जा रहा है। यह इलाका जिला मुख्यालय से दूर होने के कारण इसका लाभ पत्थर कारोबारी उठा रहे है। जबकि दलिया में बंद पड़े खदान को चालू करने के लिए बाउंसरों को तैनात किया गया है, ताकि वहां पर कोई ग्रामीण विरोध नहीं कर सके। जबकि तेलमकरी में अभी खदान का विस्तार किया जा रहा है। तेलमकरी मंे करमा नदी के आस-पास अतिक्रमण किया गया है, वहीं नदी के बीच से अस्थायी रास्ते का निर्माण भी कर दिया गया है।

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