ठगी पीड़ितों के भुगतान की गारंटी अधिनियम अनियमित जमा योजना पाबंदी अधिनियम 2019 को लागू कराने की मांग को लेकर तपजप संगठन ने मंगलवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना दिया। इससे पहले प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर थाने भेज दिया। बाद में संगठन के पांच प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज राज पुरोहित ने बताया कि पिछले 10 सालों में सरकार ने करीब तीन लाख कंपनियों और कोऑपरेटिव सोसायटियों को बंद कर दिया, जिससे देशभर में 42 करोड़ गरीब नागरिकों की मेहनत की जमा पूंजी डूब गई। 21 फरवरी 2019 को संसद ने BUDS Act 2019 पास कर भुगतान की गारंटी दी थी, लेकिन छह साल बाद भी इसका क्रियान्वयन राजस्थान में नहीं हो सका। इससे राज्य के करीब 2.5 से 3 करोड़ निवेशकों को राहत नहीं मिल पाई है। 1 सितंबर 2024 से चल रहा असहयोग आंदोलन प्रदेशाध्यक्ष एम. पी. शर्मा ने बताया कि संगठन 1 सितंबर 2024 से अनिश्चितकालीन असहयोग आंदोलन चला रहा है। इस दौरान सभी जिलों में हजारों ज्ञापन कलेक्टरों को सौंपे जा चुके हैं। संगठन का कहना है कि ठगी के कारण हजारों परिवार बेघर हो गए, कई पीड़ितों ने आत्महत्या कर ली। संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी को सक्षम अधिकारी और संभागीय आयुक्त एवं जिला कलेक्टर को सहायक सक्षम अधिकारी नियुक्त किया जाए। साथ ही, हर जिले में भुगतान पटल खोलने का आदेश दिया जाए, ताकि निवेशकों को उनकी रकम वापस मिल सके। कुछ जिलों में खोले गए भुगतान पटल, बाकी में भी मांग संगठन ने बताया कि धौलपुर, दौसा, उदयपुर और करौली के जिला कलेक्टरों ने पहले ही भुगतान पटल खोल दिए हैं। ऐसे में पूरे राजस्थान में यह प्रक्रिया लागू करने की मांग की गई है। इस प्रदर्शन और मुलाकात में राष्ट्रीय संयोजक मदन लाल आजाद, राष्ट्रीय महामंत्री एडवोकेट भरत कुमावत, प्रदेश प्रवक्ता ब्रजमोहन योगी, प्रदेश महासचिव प्रेम बिहारी मीना समेत हजारों कार्यकर्ता और पीड़ित परिवार शामिल हुए। संगठन ने सरकार से मांग की कि निर्दोष एजेंटों को सुरक्षा दी जाए और निवेशकों को उनकी राशि वापस दिलाने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।


