जरूरतमंदों को कंबल व राशन बांटना मंदिर की गतिविधियों में शामिल

भास्कर न्यूज | धौलपुर आस्था जब सेवा से जुड़ती हैं,तो मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं रहता,वह समाज की ढाल बन जाता हैं। गांव समोला स्थित प्राचीन वनखंडी धाम सरकार मंदिर ने यही उदाहरण पेश कर समाज के लिए एक नजीर पेश की हैं। जहां रोज होने वाली आरती और भोग के साथ-साथ अनाथ,निराश्रित और जरुरतमंद लोगों के जीवन की बुनियादी जरुरतें भी पूरी की जा रही हैं। यह मंदिर अब श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ-साथ सैकड़ों असहाय व अनाथ लोगों के लिए सहारा बन चुका हैं। जहां मंदिर परिसर में संचालित सेवा कार्यों के तहत अनाथ बच्चों,बेसहारा वृद्धों और आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों को नियमित भोजन,वस्त्र और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती हैं। मंदिर के पंडित अजय मिश्रा का कहना हैं कि यह सहायता किसी दिखावे के लिए नहीं,बल्कि निरंतर और व्यवस्थित रुप से दी जा रही हैं। मंदिर में रहने वाले प्रभुजी की दैनिक जरुरतों व अनाथ बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनके खर्च तक का ध्यान रखा जा रहा हैं,वहीं निराश्रित बुजुर्गों के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई हैं। इस सेवाभाव को देखकर मंदिर से जुड़े सेवकों का कहना है कि सेवा ही सच्ची पूजा हैं। मंदिर के द्वारा समय समय पर जरूरतमंदों की सहायता की जा रही है। इसी भावना के साथ यहां हर दिन भंडारा,छप्पन भोग लगते दिखाई देते हैं,जहां जाति-धर्म से ऊपर उठकर हर जरुरतमंद को भोजन मिलता हैं। ठंड के मौसम में कंबल वितरण,गर्मियों में शीतल जल और जरुरतमंदों को राशन उपलब्ध कराना मंदिर की नियमित गतिविधियों में शामिल हैं। वनखंडी धाम सरकार मंदिर की इस पहल में श्रद्धालुओं की भागीदारी भी अहम भूमिका निभा रही हैं। कोई अनाज दान करता हैं,कोई वस्त्र,तो कोई बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाता हैं। यही सामूहिक सहयोग मंदिर को समाज सेवा का मजबूत केंद्र बना रहा हैं। यहां आने वाले भक्तों का कहना हैं कि यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं,बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का जीवंत उदाहरण बनकर उभर रहा हैं। अनाथ बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और बुजुर्गों की आंखों में सुकून इस बात का प्रमाण हैं कि सही दिशा में की गई सेवा समाज को कितना बदल सकती हैं। वनखंडी धाम सरकार मंदिर ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची भक्ति वही हैं,जो किसी के जीवन में उम्मीद की रोशनी जला दे।

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